इस बैंबू वैली में तीन तरह की प्रजातियां लगी हुई हैं। इनमें पहली गोल्डन बैंबू, दूसरी बुद्धा वैली बैंबू और तीसरा लाठी बांस की प्रजातियां शामिल हैं। देखरेख के अभाव में वैली से बुद्धा बैंबू लगभग समाप्ति की कगार पर पहुंच रहा है।
आमदनी का जरिया बन सकती है वैली
दुर्लभ बैंबू वैली यूटी प्रशासन के लिए आमदनी का जरिया बन सकती है। वैली में लगे एक बैंबू की बाजार में कीमत लगभग 500 से 800 रुपये तक है। जो उम्र पूरी कर चुके बैंबू हैं, प्रशासन उनको बेचकर लाखों रुपये का राजस्व प्राप्त कर सकता है लेकिन अभी तक प्रशासन ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया है।
लॉकडाउन में चोरी हुई बैंबू
वैली में सूख चुके बैंबू का कटान नहीं होने के कारण अब इसकी चोरी शुरू हो गई है। लॉकडाउन के दौरान सेक्टर-22 से बैंबू वैली से सूखे हुए पेड़ों का अवैध कटान हुआ। चोर चार ट्रॉली में बैंबू को भरकर ले गए लेकिन उद्यान विभाग के अधिकारियों को इसकी जानकारी तक नहीं लगी।
मानसून के दौरान पौधरोपण के कारण काफी व्यस्तता चल रही है। पौधरोपण के बाद सूखे बैंबू की कटाई शुरू की जाएगी। सेक्टर-22 से चोरी हुए बैंबू की जानकारी नहीं है। शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। प्रवेश शर्मा, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर, हॉर्टीकल्वचर डिपोर्टमेंट यूटी