चंडीगढ़ के गवर्नमेंट मेडिकल एंड स्पेशलिटी हॉस्पिटल-16 में जल्द ही 300 बेड के मदर चाइल्ड हेल्थ विंग (एमसीएच) का निर्माण शुरू होने वाला है। इंजीनियरिंग विभाग ने इसका नक्शा तैयार कर लिया है और स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन से अनुमति भी मिल चुकी है।
नौ करोड़ के इस प्रोजेक्ट को एक साल के अंदर पूरा किया जाना है। 300 बेड के एमसीएच विंग बन जाने के बाद चंडीगढ़ के साथ ही अन्य प्रदेशों से आने वाली गर्भवती महिलाओं और नवजातों को उच्चस्तरीय चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध हो पाएंगी। मौजूदा समय में इस सुविधा के अभाव में मरीजों को रैफर करना पड़ता है। मार्च तक निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा।
स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग का पुराना भवन तोड़कर बनेगा नया विंग
जीएमएसएच-16 स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग के भवन को तोड़कर बहुमंजिला भवन बनाया जाएगा। इसमें 300 बेड के एमसीएच विंग का संचालन होगा। इसके लिए जल्द ही निर्माण कार्य शुरू करने की तैयारी की जा रही है।
अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. वीके नागपाल ने बताया कि निर्माण कार्य के दौरान स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की व्यवस्था को प्रभावित किए बिना उसे सेक्टर-22 स्थित सिविल अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया जाएगा ताकि गर्भवती महिलाओं और बच्चों को बिना किसी रुकावट के समुचित इलाज मुहैया होता रहे।
नवजात को मिल सकेगा बेहतर इलाज
मौजूदा समय में अस्पताल में नियोनेटल केयर की बेहतर व्यवस्था न होने के कारण नवजात को गंभीर स्थिति में इलाज के लिए पीजीआई या जीएमसीएच- 32 रेफर करना पड़ता है। डॉ. नागपाल ने बताया कि नवजात के इलाज में होने वाली एक मिनट की देरी भी बेहद गंभीर होती है। ऐसे में एमसीएच विंग का निर्माण हो जाने से नवजात को समय पर बेहतर इलाज उपलब्ध कराना संभव हो पाएगा। इसके साथ ही पीजीआई और जीएमसीएच- 32 पर मरीजों का दबाव कम करने में भी काफी मदद मिलेगी।
पीपीपी मॉडल से नहीं होगा काम
सरकारी सेवाओं में पीपीपी मॉडल के विरोध को देखते हुए एमसीएच विंग को पूर्णरूप से सरकारी देखरेख में संचालित करने का निर्णय लिया गया है। डॉ. नागपाल ने बताया कि इसके लिए सरकार डॉक्टर और कर्मचारी नियुक्त करने के साथ ही अन्य सभी व्यवस्थाएं भी करेंगी। इसके लिए किसी एजेंसी को जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी।
निर्माण के लिए इंजीनियरिंग विभाग ने प्रक्रिया शुरू की
मदर चाइल्ड हेल्थ विंग के निर्माण के लिए इंजीनियरिंग विभाग ने प्रक्रिया शुरू कर दी है। उम्मीद है कि मार्च के पहले सप्ताह से निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। निर्माण कार्य पूरा करने के लिए एक साल की अवधि तय की गई है, जिसके अनुसार 2022 में मां और नवजात को उच्चस्तरीय इलाज मिलना शुरू हो जाएगा।