पंडित बीरेंद्र नारायण मिश्र ने कहा कि नवरात्रि पर्व का शुभारंभ अश्विनी नक्षत्र में हो रहा है, जिसका ग्रह केतु और स्वामी अश्विनी कुमार हैं। अश्विनी कुमार आरोग्य के देवता हैं और देवों के वैद्य हैं, इसलिए इस समय में कोरोना महामारी से कुछ राहत मिलने की संभावना है। अमृत एवं सर्वार्थ सिद्धि योग की उपस्थिति सुख एवं संपत्ति का प्रदाता बनाता है। शक्ति उपासना का यह महापर्व 20 अप्रैल तक चलेगा।
कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, 13 अप्रैल को घट स्थापना की जाएगी। घट स्थापना का मुहूर्त सुबह पांच बजकर 28 मिनट से सुबह 10 बजकर 14 मिनट तक रहेगा। बीरेंद्र नारायण मिश्र ने बताया कि नवमी 21 अप्रैल को सुबह 12 बजकर 45 मिनट पर प्रारंभ होगी। 22 अप्रैल को सुबह 12 बजकर 37 मिनट तक रहेगी।
उन्होंने कहा कि देवी व्रत में कुमारी पूजन बेहद आवश्यक है। यदि सामर्थ्य हो तो नवरात्र भर अन्यथा समाप्ति के दिन 9 कन्याओं के चरण धोकर देवीरूप का गंध पुष्प आदि से अर्चन कर आदर सहित मिष्ठान और भोजन कराना चाहिए और वस्त्र आदि से सत्कृत करना चाहिए।