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नगर निगम के 5 साल, न कोई काम और न कोई प्रोफिट, लॉस ही लॉस

Sun, 06 Nov 2016 02:41 PM IST
राजेश ढल्ल/अमर उजाला, चंडीगढ़
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सेक्टर 17 के व्यापारियों के साथ मीटिंग करते हुए मेयर अरुण सूद - फोटो : अमर उजाला
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चंडीगढ़ नगर निगम के कार्यकाल को 5 साल हो गए, लेकिन न कोई काम हुआ और न ही कोई फायदा। वहीं, नुकसान जरूर उठाना पड़ा। वो भी बजट कटौती का, जो पिछले दो साल से लगातार कट रहा है। नगर निगम इन 5 सालों जहां कई अहम काम नहीं कर पाया वहीं कई काम ऐेसे भी हैं जो निगम सदन ने पास करके प्रशासन को भेजे हैं लेकिन अभी वहां से मंजूरी न मिलने के कारण अटके हुए हैं।
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इनको प्रशासन से मंजूरी दिलवाने में सभी मेयर और पार्षद नाकाम रहे हैं। प्रशासन ने नगर निगम के खिलाफ जाते हुए पिछले साल शहरवासियों पर हाउस टैक्स भी थोप दिया था। लेकिन हाउस टैक्स लगाने के बदले में नगर निगम द्वारा शहरवासियों को अतिरिक्त सुविधा नहीं दी गई। इन कामों को अपने चुनावी घोषणा पत्र में शामिल करने जा रहे हैं।

पार्षदों ने एकजुट होकर प्रशासन पर दबाव बनाने की बजाय एक दूसरे पर आरोप लगाने की राजनीति जरूर की। अब दिसंबर में नगर निगम चुनाव होने जा रहे हैं। पिछेले कार्यों को पूरा करवाने का दावा उम्मीदवार एक बार फिर से करेंगे। कांग्रेस और भाजपा फिर से  प्रशासन की ओर से नगर निगम के बजट में भी पिछले दो साल से कटौती की जा रही है।
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प्रस्ताव जो निगम से पास हुए मगर प्रशासन ने नहीं दी मंजूरी

चंडीगढ़ के मेयर अरुण सूद अपने टीम सदस्यों के साथ
कम्युनिटी पार्किंग
शहर में इस समय रिहायशी और कॉमर्शियल एरिया हर जगह पार्किंग की समस्या ने विकराल रूप धारण कर लिया है। पिछले पांच सालों में शहर में एक भी कम्युनिटी पार्किंग नहीं बनी है। जबकि शहर में 1500 पार्क हैं। पार्षद कई बार अपने एरिया में कोई पार्क कम करके कम्युनिटी पार्किंग बनाने की मांग कर चुके हैं, लेकिन प्रशासन पर इसका कोई असर नहीं है। शहर में एकमात्र सेक्टर-19 में कम्युनिटी पार्किंग है।

सोसाइटियों के भीतर विकास करवाना
इस समय दक्षिणी सेक्टरों के तीसरे फेज का सबसे ज्यादा बड़ी मांग यह है कि उनके यहां पर निजी सोसाइटियों के भीतर भी विकास नगर निगम करवाए। नगर निगम ने यह प्रस्ताव पास करके प्रशासन को मंजूरी के लिए भेजा है लेकिन एक साल से यह प्रस्ताव प्रशासन के पास ही अटका है। दक्षिणी सेक्टर में इस समय 150 से ज्यादा सोसाइटियां है।

सोसाइटियों के भीतर सड़क, पार्क और पेवर ब्लाक पर खर्चा सोसाइटी के  लोग अपनी जेब से करते हैं। चुनाव में फिर से यह मुद्दा उछलने जा रहा है क्योंकि इससे लाखों लोग जुड़े हुए हैं। यहां पर रहने वाले लोगों का कहना है कि जब वे अन्य सेक्टरों में रहने वालों के बराबर टैक्स अदा करते हैं तो सोसाइटी में रहने वाले निवासियों को भी पूरी मूल भूत सुविधाएं मिलनी चाहिए।

पीयू, पीजीआई और पेक के लोगों को वोट का फायदा नहीं
पीजीआई, पीयू और पेक के भीतर नगर निगम को कोई काम नहीं करवा सकता है। जबकि यहां के लोग चाहते हैं कि अन्य एरिया की तरह उनके यहां भी नगर निगम विकास कार्य करवाए। इन एरिया के हजारों मतदाता पार्षद चुनाव में मतदान करते हैं परंतु  वोट का फायदा उनको नहीं मिलता है। नगर निगम सदन यहां काम कराने संबंधी प्रस्ताव पास कर चुका है लेकिन प्रशासन मंजूरी नहीं दे रहा है।

इन प्रस्तावों पर भी नहीं लगी प्रशासन की मुहर

नगर निगम कमिश्नर बी पुरुषार्था और मेयर अरुण सूद की प्रेसवार्ता
उप्पल पर कार्रवाई नहीं
मनीमाजरा में उप्पल हाउसिंग प्रोजेक्ट पर कार्रवाई करने की मांग पास करके प्रशासन को भेजी गई है लेकिन प्रशासन ने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है। मालूम हो कि उप्पल हाउसिंग प्रोजेक्ट ने 15 प्रतिशत ईडब्लयूएस फ्लैट्स का निर्माण न करने की शर्त पूरी नहीं की है।

कर्मचारियों को भरती करने की मंजूरी नहीं
नगर निगम पिछले पांच साल से लगातार कर्मचारियों की भरती की मंजूरी मांग रहा है। प्रशासन नगर निगम को कर्मचारियों की भरती के लिए फंड देने के लिए तैयार नहीं है जिस कारण निगम में इस समय रिटायर्ड कर्मचारियों से काम करवा रहा है। कर्मचारियों की कमी के कारण शहरवासियों की सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।

प्राइमरी स्वास्थ्य और शिक्षा की हालत नहीं सुधरी
नगर निगम प्रशासन से मांग कर रहा है कि प्राइमरी स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग पूरी तरह से शिफ्ट किया जाए, लेकिन प्रशासन ऐसा नहीं कर रहा है। नगर निगम ने पिछले माह सदन की बैठक में निर्णय लिया है कि प्रशासन चाहे तो यह विभाग वापस ले ले।

इस समय यह दोनों विभाग सिर्फ नाम के लिए नगर निगम केपास हैं, जबकि नगर निगम डिस्पेंसरियों और स्कूलों की हालत सुधार नहीं पा रहा है। इसी कारण नगर निगम को हर माह मिलने वाला बजट भी इन विभागों पर खर्च नहीं हो पाया।

मनोनीत को नहीं मिला वार्ड डेवलपमेंट फंड
नगर निगम ने मनोनीत पार्षदों के लिए निर्वाचित की तर्ज पर शहर के लिए डेवलपमेंट फंड की मांग की थी। लेकिन नगर निगम ने इसे पूरा नहीं किया। यहां तक की पार्षद पंजाब की तर्ज पर मानदेय बढ़ाने की मांग कर रहे है लेकिन वह नहीं मिल रहा है।

मंजूरी के बिना ये प्रस्ताव भी रह गए अधूरे

सेक्टर 17 के व्यापारियों के साथ मीटिंग करते हुए मेयर अरुण सूद - फोटो : अमर उजाला
रिटायर्ड फौजियों को नहीं मिली टैक्स से छूट
इसके साथ ही प्रशासन पूर्व फौजियों को राहत देने के लिए तैयार नहीं है। आर्मी पर्सन पंजाब की तर्ज पर हर एरिया के मकान को हाउस टैक्स पर छूट देने की मांग कर रहे हैं जबकि प्रशासन की ओर से सिर्फ 12 मरले तक के मकानों में रहने वालों को हाउस टैक्स से छूट दी गई है। लेकिन यह छूट भी उन आर्मी अधिकारियों को मिलेगी जिन्होंने किराएदार नहीं रखे हैं।

नगर निगम भी इस मांग को जायज बता चुका है लेकिन प्रशासन मंजूरी नहीं दे रहा।  रिटायर्ड मेजर एवं मनोनीत पार्षद डीएस संधू का कहना है कि  फौजी परिवारों में प्रशासन के प्रति भारी रोष है क्योंकि प्रशासन उनकी मांग पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। उनका कहना है कि सैनिक कोई अतिरिक्त सुविधा की मांग नहीं कर रहे हैं बल्कि पंजाब में जो सुविधा मिल रही है उसकी ही मांग कर रहे हैं।

बागवानी बायलाज 5 साल से ज्यादा समय से पड़े हैं
शहर की ग्रीन बेल्ट्स और पार्कों के रखरखाव के लिए नगर निगम ने बागवानी बायलाज बनाए लेकिन यह बायलाज 5 साल से ज्यादा समय से प्रशासन के पास ही धूल फांक रहे हैं।

मल्टीलेवल के सरफेस पर विज्ञापन की मंजूरी नहीं
इस समय सेक्टर-17 का मल्टीलेवल पार्किग का प्रोजेक्ट नगर निगम के लिए प्रशासन के कारण ही सफेद हाथी बना हुआ है। प्रशासन ने सरफेस पर विज्ञापन के लिए मंजूरी देने से इंकार कर दिया है जिस कारण नगर निगम किसी कंपनी को विज्ञापन की सुविधा देकर मल्टीलेवल नहीं चला पा रही है। इसलिए नगर निगम अब खुद मल्टीलेवल पार्किंग चलाकर हर माह तीन लाख रुपये से ज्यादा का घाटा हो रहा है।
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ये कहना है शहर के दिग्गज नेताओं का

ट्राइसिटी के मेयरों की बैठक - फोटो : amar ujala
प्रशासन और नगर निगम में पेपर वर्क ज्यादा होते हैं, जबकि हकीकत में लोगों की समस्याएं दूर नहीं हो रही हैं। प्रशासन और नगर निगम को वह करना चाहिए जो कि शहर के रेजिडेंट्स चाहते हैं। शहरवासियों को पार्षदों की राजनीति से कोई मतलब नहीं है। उन्हें अपनी सुविधाएं चाहिए। अब शहरवासियों को सिर्फ नवनियुक्त प्रशासक वीपी सिंह बदनौर से ही उम्मीद है।
- बलजिंदर सिंह, चेयरमैन, फासवेक  

पिछले कार्यकाल में कांग्रेस का नगर निगम का कब्जा था, वह काम नहीं करवा पाई ।जबकि इस साल कई ऐसे काम हुए हैं जो कई सालों से पेंडिंग थे। जो काम प्रशासन की मंजूरी के लिए पेंड़िग पड़े हुए हैं उनको भी पूरा किया जाएगा। इस साल इतने काम हुए हैं कि जितने कांग्रेस पिछले 4 साल में भी नहीं करवा पाई है।
- अरुण सूद,मेयर

जमीनी स्तर पर भाजपा मेयर और सांसद पूरी तरह से असफल हैं। पिछले दो साल में सिर्फ दावे ही किए गए हैं जबकि हकीकत में लोगों का कोई सुविधा नहीं मिली है। प्रशासन से पहले कांग्रेस ने ही काम करवाए थे और अब चुनाव जीतने के बाद कांग्रेस ही शहर का विकास करवाएगी।
- प्रदीप छाबड़ा अध्यक्ष, कांग्रेस 
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