नगर निगम ने पुराने प्रस्ताव में पानी के कनेक्शन के लिए दोगुना दाम वसूलने और जबसे मकान बना है तबसे बकाया बिल जमा करने की शर्त रखी थी। कमेटी के सदस्यों ने इसे गलत बताया और कहा कि लोगों से कनेक्शन के लिए सामान्य शुल्क ही वसूला जाए। साथ ही एक साल का बकाया बिल जमा करने के साथ ही कनेक्शन देने की व्यवस्था होनी चाहिए। अब यह प्रस्ताव सदन की बैठक में लाया जाएगा। वहां से सहमति मिलने के बाद इस पर आगे का कार्य होगा।
मालिकाना हक बताने के लिए कोई न कोई दस्तावेज देना ही होगा
कमेटी के सामने सबसे बड़ा दिक्कत यह थी कि लाल डोरा के बाहर बने अवैध मकानों में रह रहे लोग पानी का बिल दिखाकर अपने निर्माणकार्य को वैध बताने लगे तो बड़ी समस्या खड़ी हो जाएगी। ऐसे में कमेटी ने फैसला लिया कि पानी का कनेक्शन देते समय सबसे पहली शर्त यह होगी कि पानी का बिल निगम व मकान मालिक के बीच सेवा देने का एक अस्थायी अनुबंध के तौर पर ही रहेगा। दूसरा बैठक में यह मुद्दा उठा था कि जब निर्माण कार्य अवैध है तो दस्तावेज कहां से आएंगे। इस पर कमेटी ने तय किया कि मकान मालिक को अपना मालिकाना हक बताने के लिए कोई न कोई दस्तावेज तो देना ही होगा।
कमेटी के सदस्यों ने तय किया कि कनेक्शन लेने के लिए सीवर कनेक्शन होना जरूरी है ताकि ऐसा न हो कि सीवर का पानी सुखना या एन चो में गिरता मिले। कनेक्शन से पहले इसकी पुष्टि क्षेत्रीय पार्षद या जेई करेगा। कनेक्शन के लिए पाइप लाइन से लेकर घर के अंदर तक पाइप डालने का खर्चा लोगों को ही देना होगा।
पानी के बिलों का करीब सात करोड़ रुपये बकाया
नवंबर माह में हुई सदन की बैठक में निगम ने जानकारी दी थी कि लोग बिना कनेक्शन लिए पानी का उपयोग कर रहे हैं। सर्वे में ऐसे 2128 लोगों को चिह्नित किया गया था। इन पर नगर निगम का 6 करोड़ 87 लाख 89 हजार 728 रुपये बकाया है।
निगम की ओर से बताया गया कि इन गांवों में 17750 कनेक्शन धारक हैं, जो कि लाल डोरे के अंदर हैं। वहीं, 3837 कनेक्शन धारक लाल डोरे के बाहर हैं। पार्षदों ने कहा कि जब लोग निगम को बिना शुल्क दिए पानी का उपयोग कर रहे हैं तो क्यों न एकमुश्त राशि लेकर लोगों को कनेक्शन दे दिया जाए। इससे निगम को कुछ राजस्व तो आएगा।
पानी की व्यवस्था मूलभूत सुविधाओं में है। यह लोगों का मौलिक अधिकार भी है। शहरवासियों को मूलभूत सुविधा उपलब्ध कराना हमारा कर्तव्य है। इसलिए लोगों को जो रियायत दे सकते हैं, वह देकर वैध पानी का कनेक्शन देंगे। लोगों की भी यही मांग थी। इससे निगम का राजस्व भी बढ़ेगा। - रविकांत शर्मा, मेयर।