नगर निगम चंडीगढ़, यूटी प्रशासन से खासा नाराज है। क्योंकि वित्तीय हालत सुधारने के लिए प्रशासन निगम को अतिरिक्त फंड देने के लिए कतई तैयार नहीं है। वहीं, जो प्रोजेक्ट पीएम नरेंद्र मोदी के साथ जुड़ा हुआ है, उसके लिए ग्रांट की कोई दिक्कत नहीं है। प्रशासन ने मलोया में पुनर्वास योजना के तहत बनने वाले सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के लिए नगर निगम को 21 करोड़ की ग्रांट दे दी है। इस प्लांट के बिना यह हाउसिंग प्रोजेक्ट पूरा नहीं हो सकता। ट्रीटमेंट प्लांट को लगाने का प्रशासन ने नगर निगम को अक्तूबर तक का समय दिया है।
मलोया में सीवरेज ट्रीटमेंट लगाने के काम का टेंडर पहले से ही नगर निगम ठेकेदार को अलाट कर चुका है, लेकिन वित्तीय हालत खस्ता होने के चलते यह प्रोजेक्ट पूरा नहीं हो रहा था। प्रशासन चाहता है कि लोकसभा चुनाव से पहले साल के अंत तक मलोया में पुनर्वास योजना के तहत बने फ्लैट्स की चाबियां पीएम मोदी की ओर से लोगों को दिलवाई जाएं। ऐसा कर भाजपा लोकसभा चुनाव में क्रेडिट लेना चाहती है। भाजपा को पता है कि अगर अगले लोकसभा चुनाव से पहले यह मकान नहीं सौंपेगे तो काफी किरकिरी होगी। इस पूरे प्रोजेक्ट को अब प्रशासन के वित्त सचिव खुद देख रहे हैं।
प्रशासन के वित्त सचिव की ओर से नगर निगम के जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का काम जल्द से जल्द पूरा करने के लिए कहा गया है, जिसके बाद सुपरिंटेंडट इंजीनियर संजय अरोड़ा ने प्लांट का निर्माण करने वाली कंपनी के साथ भी बैठक कर ली है। अब वीरवार को मौके का निरीक्षण करने केलिए एसई खुद जा रहे हैं। यह प्रोजेक्ट पहले से काफी देरी से पूरा हो रहा है। साल 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले 2013 में कांग्रेस कार्यकाल में भी धनास में बने फ्लैट्स की चाबियां सौंपने के लिए तत्कालिन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह आए थे।
उस समय मलोया के फ्लैट्स का निर्माण कार्य शुरू हो चुका था। इस समय नगर निगम की वित्तीय हालत काफी खस्ता है। ऐसे में प्रशासन ने नगर निगम को कहा कि वह उनकी इस साल की ड्यू पड़ी सड़कों की कारपेटिंग और कम्युनिटी सेंटरों का निर्माण कर देगा। इसके लिए प्रशासक ने भी मंजूरी दे दी है, लेकिन नगर निगम के अधिकतर पार्षद इसके लिए तैयार नहीं हैं। वह चाहते हैं कि प्रशासन फंड जारी करे।
अपना हक मांग रहे हैं भीख नहीं
जब प्रशासन मलोया में बने फ्लैट्स में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने के लिए 21 करोड़ की राशि देने के लिए तैयार है तो बाकी प्रोजेक्ट के लिए प्रशासन को फंड जारी करने चाहिए। दूसरे प्रोजेक्ट भी शहर की जरूरत हैं। नगर निगम प्रशासन के अधिकारियों से कोई भीख नहीं मांग रहा है, जबकि फंड में अपना शेयर मांग रहा है। चालू वित्तीय सत्र के लिए 17.5 की बजाय 6.5 प्रतिशत की ग्रांट इन एड ही नगर निगम को दी गई, जिससे नगर निगम में वित्तीय संकट छाया है।
-सतीश कैंथ, भाजपा पार्षद
चाबियां सौंपने के बाद शहर हो जाएगा स्लम फ्री
पुनर्वास योजना के तहत मलोया में 4960 फ्लैट का निर्माण हो चुका है। यह फ्लैट सौंपने के बाद शहर स्लम फ्री बन जाएगा, लेकिन पिछली सरकार ने साल 2006 के सर्वे की रिपोर्ट के अनुसार शहर को स्लम फ्री बनाने के लिए 25 हजार फ्लैट का निर्माण करने की योजना बनाई थी, जिसके तहत 12 हजार 736 फ्लैट का निर्माण पूरा होकर लोगों में बांट दिया गया है, जबकि योजना के अनुसार बाकी बचे 12992 फ्लैट का निर्माण होना चाहिए, लेकिन हकीकत है कि इस समय शहर में सिर्फ 4960 लोग ही बचे हैं, जिन्हें पुनर्वास योजना के तहत दिया जाना है।