देखते ही देखते स्कूल के पीछे सूखे पत्तों के कई ढेर बन गए। शनिवार को मौका देखते ही कर्मियों ने पत्तों पर आग लगा दी। आग की लपटें काफी ऊंची उठीं और स्थानीय लोग भी धुंए को देख परेशान हो गए। आग इतनी तेज थी कि पास के कूड़े में भी लग गई। धुआं इतना ज्यादा था कि पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। हालांकि वहां पर पुलिस को कोई नहीं मिला, इसलिए वह बिना कार्रवाई के लौट गई। देर रात तक धुंआ उठता रहा।
अव्यवस्था का आलम
शहर में किस कदर अव्यवस्था फैली हुई है, इसका अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि यूटी प्रशासन सेक्टर-26 स्थित ट्रांसपोर्ट चौक पर 24 फुट ऊंचा एक टावर बना रहा है। यह हवा को शुद्ध करेगा, दूसरी तरफ नगर निगम के कर्मचारी सूखे पत्तों व कचरे को एकत्रित कर उनमें आग लगा रहे हैं। इससे आसपास की हवा दूषित व जहरीली हो रही है। सेक्टर-8 में नगर निगम के बागवानी विभाग ने एक गड्ढा बनाया है, जहां वह पार्कों से निकलने वाले पत्तों को एकत्रित करते हैं और खाद बनाते हैं। शहर के सूखे पत्तों को लेकर निगम के पास कोई ठोस रणनीति अभी तक नहीं है।
ऐसे हालात में शहर का स्वच्छता सर्वेक्षण में पिछड़ना तय
स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए केंद्र सरकार की टीमें चंडीगढ़ में घूम रही हैं। शनिवार को भी उन्होंने कई सेक्टरों का दौरा किया और साफ-सफाई की जांच की। ऐसे में नगर निगम के कर्मचारी खुले में कूड़े जला रहे हैं, इससे शहर का स्वच्छता सर्वेक्षण में पिछड़ना तय है। ये टीमें सफाई, शौचालय व्यवस्था और कूड़ा प्रबंधन को देखकर केंद्र सरकार को रिपोर्ट देंगी। स्वच्छता रैंकिंग 2019-20 में भी चंडीगढ़ टॉप 10 में जगह नहीं बना सका था। मामूली सुधार के साथ सिटी ब्यूटीफुल देश में 16वें पायदान पर रहा।
- ये काफी गंभीर बात है। मेरे संज्ञान में ये मामला आया है। एमओएच से इस बारे में पता करूंगा और अगर किसी की लापरवाही पाई गई तो उसके खिलाफ कार्रवाई भी करेंगे। - रविकांत शर्मा, मेयर।
पार्कों के पत्तों को वहीं बने गड्ढों में रखा जाता है। इससे खाद बनती है। सड़कों के पत्तों को एमओएच उठाता है। इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है। - केपी सिंह, एसई, बागवानी विभाग।