हत्या के मामले में चंडीगढ़ पुलिस ने जिसे बालिग बताया, उसे अदालत ने नाबालिग करार दे दिया। केस जुवेनाइल में ट्रांसफर।
कोर्ट ने आरोपी के ओसिफिकेशन टेस्ट की रिपोर्ट के आधार पर यह फैसला दिया है। उसके दांतों की जांच में आरोपी की उम्र 14 से 16 वर्ष के बीच, हड्डियों की जांच के आधार पर 15 से 17 साल आई है। इसके साथ ही कोर्ट ने केस को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड में ट्रांसफर कर दिया है।
सेक्टर-11 थाना पुलिस ने 26 सितंबर 2015 को हत्या की धारा के तहत संबंधित केस दर्ज किया था। पुलिस द्वारा आरोपी को बालिग बताते हुए अदालत में चालान सौंपा था। इसके बाद अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने उसके खिलाफ आरोप भी तय कर दिए थे।
बचाव पक्ष की वकील इंद्रजीत बस्सी ने बताया कि आरोपी नाबालिग है। इसलिए उन्होंने 27 जनवरी को ओसिफिकेशन टेस्ट की अपील दायर की। उनके अनुसार पुलिस ने मामले में आरोपी की उम्र की जांच किए बिना ही उसके खिलाफ केस दर्ज कर दिया। पुलिस ने आरोपी को 18 साल का दिखा कर केस दर्ज किया था।
नाबालिग हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले का रहने वाला है। पुलिस में दर्ज मामले के अनुसार 25 सितंबर 2015 को पीजीआई गेट के पास झगड़े की सूचना मिली थी। मौके पर पहुंचने पर पता चला कि घायल को जीएमएसएच-16 में भर्ती करवाया गया है। वहां जाने पर पता लगा कि उसकी मौत हो गई है।
मामले में शिकायतकर्ता डीएमसी के जरनैल सिंह थे। उन्होंने पुलिस को बताया कि घटना वाली रात को साढ़े 9 बजे वह पीजीआई के गेट नं-1 पर सवारी का इंतजार कर रहे थे। इसी दौरान वहां दो युवक आपस में झगड़ने लगे। इनमें से एक ने दूसरे युवक राहुल के पेट और छाती पर चाकू से 3 से 4 वार किए।
इस पर वह वहां पहुंचे और घायल को ऑटो में डालकर अस्पताल ले गए। बाद में पुलिस ने इस मामले में आरोपी सेक्टर-25 निवासी नाबालिग को पकड़ा था।