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एमसी चुनाव: इतिहास गवाह है, शहरवासियों ने कभी नहीं दिया एक दल को स्पष्ट बहुमत

Mon, 05 Dec 2016 12:38 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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municipal corporation elections - फोटो : Demo Pic
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कांग्रेस और भाजपा अपने दम पर मेयर बनाने का दावा कर रही है, लेकिन अब तक का इतिहास कुछ और ही रहा है। नगर निगम के गठन के बाद यह 5वां चुनाव होने जा रहा है। लेकिन पिछले चुनावों के नतीजों पर नजर डाली जाए तो यह देखा जाएगा कि किसी भी दल को अब तक स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है।
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कांग्रेस और भाजपा को मेयर की कुर्सी पर कब्जा करने के लिए प्रशासन की ओर से नियुक्त मनोनीत पार्षदों के समर्थन की जरूरत रहती थी। इसलिए हर मेयर चुनाव में मनोनीत पार्षदों का काफी बोलाबाला रहता है। साल 2017 से शुरू होने वाले नगर निगम के नए कार्यकाल के लिए भी इसी माह की 20 या 21 दिसंबर को नए 9 मनोनीत पार्षदों की नियुक्ति कर दी जाएगी।

13 पार्षदों वालों ने बनाया मेयर
1996 से लेकर 2006 के तीन चुनाव तक जिस भी दल के 13 पार्षद जीते हैं उसी का नगर निगम में मेयर बना है। साल 1996 में भाजपा के 13 पार्षद जीते थे जिसके बाद 4 साल तक भाजपा ने ही मेयर बनाए थे लेकिन अंतिम साल में भाजपा की गुटबाजी के कारण राज कुमार गोयल मेयर बन गए थे। राज कुमार गोयल समाजवादी जनता पार्टी से जीते थे, लेकिन बाद में वह कांग्रेस में शामिल हो गए थे। उस समय कांग्रेस की सिर्फ एक ही पार्षद कमलेश जीती थीं। साल 2001 और 2006 में कांग्रेस के 13 पार्षद चुनाव जीते थे कांग्रेस ने मनोनीत पार्षदों के दम पर अपना कब्जा जमाए रखा।
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साल 1996 से लेकर 2006 तक 13 सीटें जीतने वालों का बना मेयर

Municipal Corporation office Chandigarh - फोटो : File Photo
भाजपा के मुकाबले में कम जीते फिर भी बनाया मेयर
साल 2011 में हुए नगर निगम चुनाव में कांग्रेस ने भाजपा- अकाली गठबंधन के मुकाबले में कम सीटें जीती थीं। कांग्रेस ने 11 और भाजपा अकाली गठबंधन के 12 पार्षद जीते थे, इसके बावजूद कांग्रेस ने मनोनीत पार्षदों के समर्थन से अपना मेयर बनाया था।

मनोनीत की नियुक्ति पर राय बदली
जब तक कांग्रेस सत्ता में रही तब तक भाजपा ने हमेशा ही मनोनीत की नियुक्ति पर सवाल उठाया। भाजपा पार्षद सतिंदर सिंह ने तो पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट में नियुक्ति के आधार पर अर्जी भी डाली है, लेकिन अब भाजपा चाहती है कि मनोनीत पाषदों की नियुक्ति होनी चाहिए क्योंकि भाजपा को लगता है कि अगर कम पार्षद जीते तो वह मनोनीत पाषदों के दम पर मेयर की कुर्सी कब्जा कर लेंगे।
 
अब तक के इतिहास में किस दल ने कितनी सीटें जीतीं
राजनीतिक दल    1996         2001            2006        2011 (सीट)
अकाली                2                    1                2                2
सीवीएम              0                     3               4              0
बसपा                0                      0              1             2
एसजीपी             3                   0              0              0
भाजपा              13                  3               6            10
कांग्रेस                 1                13             13            11
निर्दलीय              0                 0               0              1
मनोनीत              9                  9                9             9
 
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साल 2011 में कांग्रेस की सीटें कम होने के बावजूद किया कब्जा

नगर निगम, चंडीगढ़ - फोटो : demo pics
विकास मंच का गठन साल 2001 में
चंडीगढ़ विकास मंच का गठन वर्ष 2001 में पूर्व केंद्रीय मंत्री हरमोहन धवन ने किया था। लेकिन धवन ने साल 1996 के चुनाव में समाजवादी जनता पार्टी की ओर से उम्मीदवार खड़े किए थे और उस समय 4 उम्मीदवार जीत कर आए थे। जबकि विकास मंच ने वर्ष 2001 और 2006 का चुनाव भी लड़ा और वर्ष 2011 से पहले विकास मंच का विलय भाजपा में हो गया।

मनोनीत पार्षदों के पास न हीे मत का अधिकार 
सेक्टर-40 ए के रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष दलविंदर सैनी का कहना है कि मनोनीत के पास वोट का अधिकार नहीं होना चाहिए। उनका कहना है कि नगर निगम चुनाव में उस दल का ही मेयर बनना चाहिए जिसे शहर की जनता बहुमत दे। ऐसा नहीं होना चाहिए कि कम सीट जीतने वाले दल मनोनीत पार्षदों के दम पर अपना मेयर बनवा ले ऐसे में मतदाताओं का निर्णय कहा रहा गया।
 
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