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चंडीगढ़ निगम कर्मियों के लिए बड़ी खबर: जनवरी-फरवरी के वेतन पर संशय, प्रशासन ने अतिरिक्त ग्रांट नहीं दी

Wed, 29 Jan 2025 02:17 AM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

प्रशासक ने निगम अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वह अपने खर्चों को कम करें और राजस्व के साधनों को बढ़ाए। इससे निगम की परेशानियां बढ़ गई हैं, क्योंकि अधिकारियों को उम्मीद थी कि निगम को कुछ वित्तीय राहत मिलेगी।
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चंडीगढ़ नगर निगम - फोटो : फाइल
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विस्तार
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चंडीगढ़ नगर निगम को 31 मार्च से पहले यूटी प्रशासन की ओर से कोई अतिरिक्त ग्रांट नहीं मिलेगी। मंगलवार को पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया की अध्यक्षता में हुई बैठक में अब यह स्पष्ट हो गया है। अब कर्मियों को जनवरी-फरवरी का वेतन देना भी निगम के लिए चुनौती बन गया है।
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बैठक में निगम आयुक्त अमित कुमार ने निगम की वित्तीय स्थिति पर प्रेजेंटेशन दी। उन्होंने निगम के मासिक खर्चों और राजस्व के साधनों के बारे में बताया। साथ ही प्रशासन से मिले ग्रांट की भी जानकारी दी गई। वित्तीय संकट से उबरने के लिए निगम की तरफ से हाल में उठाए कदमों के बारे में भी प्रशासक को बताया गया लेकिन प्रशासक ने फिलहाल निगम को कोई अतिरिक्त ग्रांट देने के लिए हामी नहीं भरी है। 

प्रशासक ने निगम अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वह अपने खर्चों को कम करें और राजस्व के साधनों को बढ़ाए। इससे निगम की परेशानियां बढ़ गई हैं, क्योंकि अधिकारियों को उम्मीद थी कि निगम को कुछ वित्तीय राहत मिलेगी। साथ ही, निगम ने आगामी वित्तीय वर्ष के लिए 1,704 करोड़ रुपये की अनुदान सहायता की मांग की है। इसमें चौथे दिल्ली वित्त आयोग की सिफारिशें और बिजली शुल्क की प्रतिपूर्ति शामिल है, जिसका भुगतान वर्तमान में यूटी प्रशासन की ओर से नहीं किया जा रहा है। चालू वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए नगर निगम ने 1,651.7 करोड़ की अनुदान सहायता मांगी थी, जिसमें से केंद्र सरकार ने केवल 560 करोड़ ही स्वीकृत किए हैं।
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कर्मचारियों की बढ़ सकती है परेशानी, वेतन में हो सकती है देरी

दिसंबर महीने में भी कर्मचारियों को सैलरी देरी से मिली और अब जनवरी में ही लेट हो सकती है, क्योंकि निगम को यूटी से मिलने वाले 560 करोड़ के वार्षिक अनुदान में से 527 करोड़ मिल चुके हैं। अब सिर्फ 33 करोड़ रुपये ही मिलने हैं, जो फरवरी के पहले हफ्ते में मिलेंगे। जब वह पैसे निगम को मिलेंगे, तो ही सैलरी जारी होगी। हालांकि, निगम का एक महीने का खर्च करीब 70 करोड़ रुपये है। 

इसमें सभी नियमित कर्मियों की सैलरी हर महीने करीब 18.5 करोड़ रुपये (पेंशन सहित), आउटसोर्सिंग, कॉन्ट्रैक्ट व डेली वेज कर्मियों की सैलरी करीब 28 करोड़ रुपये है। इसके अलावा हर महीने करीब बिजली का बिल 11.5 करोड़ रुपये है। निगम ने रिवाइज्ड एस्टीमेट में प्रशासन ने करीब 200 करोड़ रुपये की मांग की थी, जिसे प्रशासन ने केंद्र को भेजा था लेकिन केंद्र से भी प्रशासन को रिवाइज्ड एस्टीमेट में निगम के हिस्से का पैसा नहीं मिला है। प्रशासन को अब आरई में कुछ पैसे मिले हैं, लेकिन पूरे पैसे नहीं आए हैं।

पिछले पांच साल में प्रशासन से मिली ग्रांट (करोड़ में)

वर्ष           मांगा गया अनुदान      प्राप्त अनुदान       अंतर
2024-25      1651.75              560           0.00%
2023-24       1332.50              560          1.81%
2022-23        957.38               550           3.77%
2021-22        1176.00             530            6%
2020-21        1073.00             500           11.11%
2019-20       1024.00              450              ----
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