चंडीगढ़ नगर निगम वित्तीय संकट से जूझ रहा है। वार्डों के छोटे-छोटे कामों के लिए भी नगर निगम के पास पैसे नहीं है लेकिन इस बीच सभी पार्षदों ने फिर स्टडी टूर की योजना बना ली है। इस बार सभी पार्षद लक्षद्वीप-कोच्चि या मेघालय जाने की तैयारी में है।
स्टडी टूर को लेकर सोमवार को मेयर कुलदीप कुमार की अध्यक्षता में सभी पार्टियों के पार्षदों की एक बैठक हुई, जिसमें निगम के कुछ अधिकारी भी शामिल रहे। बैठक में टूर के लोकेशन, तारीख और ट्रांसपोर्टेशन पर विस्तार से चर्चा हुई। तय हुआ है कि सभी पार्षद इसी महीने के आखिरी हफ्ते या अगले महीने के पहले हफ्ते में टूर जाएंगे। टूर के लिए दो जगहों पर चर्चा हुई है, जिसमें दक्षिण भारत में लक्षद्वीप-कोच्चि और पूर्वी भारत में मेघालय है। हालांकि अधिकतर पार्षद लक्षद्वीप-कोच्चि जाने के इच्छुक हैं। इस पर मेयर कुलदीप कुमार ने कहा कि स्टडी टूर को लेकर पार्षदों के साथ चर्चा हुई लेकिन अभी कोई जगह तय नहीं की गई है।
प्रशासक के सलाहकार देंगे मंजूरी
बता दें कि पार्षदों और मेयर की सहमति के बाद टूर के अनुमानित लागत को नगर निगम के आयुक्त को भेजा जाएगा। उनकी मंजूरी के बाद प्रशासक के सलाहकार की अंतिम मंजूरी के बाद ही पार्षद टूर पर जाएंगे। हालांकि टूर के समय को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि यही पार्षद पिछले सदन में वित्तीय संकट का मुद्दा उठा रहे थे। अब ऐसे में खुद ही लाखों रुपये खर्च करके टूर पर जाने की योजना बना रहे हैं।
आप ने पिछली बार टूर को बताया था फिजूलखर्ची
पिछले साल नगर निगम की तरफ से पार्षद गोवा के टूर पर गए थे। इसमें कांग्रेस के छह पार्षद, भाजपा के मेयर समेत पांच पार्षद, पांच मनोनीत पार्षद और अकाली दल के हरदीप सिंह समेत निगम के 11 अधिकारी गए थे। आम आदमी पार्टी के पार्षदों ने टूर का बहिष्कार किया था और इसके खिलाफ सेक्टर-39 में एक प्रेस कांफ्रेंस की थी लेकिन एक साल में ही स्थिति पूरी तरह से ही बदल गई है। अब आम आदमी पार्टी के मेयर ही सभी पार्षदों को टूर पर लेकर जा रहे हैं। पिछले साल प्रेस कांफ्रेंस में आप के वरिष्ठ नेता मलविंदर सिंह कंग समेत पार्षदों ने कई सवाल उठाए थे। कहा था ये सभी सैर-सपाटे के लिए घूमने गए हैं। पार्षद दमनप्रीत सिंह ने कहा तक कहा था कि यह स्टडी टूर नहीं है बल्कि रिश्वत टूर है। कहा था कि जितनी भी महिला पार्षद हैं, उनके पति भी इस टूर पर साथ गए हैं। उनका खर्चा भी चंडीगढ़ के लोगों पर पड़ेगा।
पार्षदों के स्टडी टूर से शहर को कभी नहीं मिला फायदा
शहरवासी हमेशा पार्षदों के स्टडी टूर के खिलाफ रहे हैं, क्योंकि स्टडी टूर पर शहर के लोगों का पैसा ही खर्च होता है लेकिन शहर को इसका कोई फायदा नहीं मिलता। शहर से अब तक जितने भी पार्षदों के स्टडी टूर गए हैं, उसका कभी भी शहर को फायदा नहीं मिला है। स्टडी टूर के आने के बाद रिपोर्ट भी बनती है लेकिन कभी भी यह लागू नहीं हुई है। पिछले 20 साल में नगर निगम पार्षदों के स्टडी टूर पर ढाई करोड़ से ज्यादा का खर्च कर चुका है।
सिर्फ देश ही नहीं, विदेश में भी स्टडी टूर पर जा चुके पार्षद
नगर निगम के अधिकारियों और पार्षदों ने 2006 से 2013 के बीच इटली, जर्मनी, सिंगापुर, बैंकॉक और इजराइल की यात्रा की। अक्टूबर 2007 में 18 पार्षदों और दो अधिकारियों को सिंगापुर और बैंकॉक भेजने के लिए कुल 15,10,560 रुपये खर्च किए गए। 2019 में पार्षदों ने लेह लद्दाख में टूर गया था, उस समय की भी घूमने फिरने की तस्वीरें सामने आई थी। उस टूर में तत्कालीन मेयर राजबाला मलिक सहित कुछ महिला पार्षदों की तबीयत भी खराब हुई थी। इस पर दस लाख रुपये का खर्च आया था। साल 2014 में पार्षद चेन्नई, कोलकाता और पोर्ट ब्लेयर के स्टडी टूर पर गए थे। इस टूर में उस समय अकाली पार्षद मलकीत सिंह की तबीयत खराब होने से मृत्यु हो गई थी।