मेयर चुनाव को लेकर भाजपा की गुटबाजी खुलकर सामने आई। टंडन गुट से सिटिंग मेयर आशा जसवाल ने पार्टी उम्मीदवार के खिलाफ ही नामांकन भर दिया। हाईकमान और स्थानीय नेताओं के दखल के बाद आशा जसवाल ने नामांकन वापस लिया। पिछले सप्ताह शहर की राजनीति में उठा पटक बनी रही। सोमवार को एक सरकारी कार्यक्रम में सांसद किरण खेर बतौर मुख्यातिथि पहुंचीं तो उनसे कुछ सवाल किए गए।
सवालों का जवाब देते हुए सांसद खेर ने कहा कि वह गुटबाजी से कोसों दूर हैं। मेरा कोई ग्रुप नहीं है। पूरे शहर और सभी पार्षदों को एक समान दर्जा देती हूं। जब उनसे पूछा गया कि पार्टी हाईकमान ने देवेश मोदगिल को मेयर कैंडिडेट चुना है तो टंडन गुट व पार्टी के ही पार्षदों ने ऐसा कदम क्यों उठाया। खेर ने जवाब दिया कि दो साल पहले अरुण सूद और पिछले साल आशा जसवाल का नाम मैंने ही मेयर कैंडिडेट के लिए दिया था। सूद और आशा को मेयर बनाने में मेरी भी सहमति थी। पार्टी हाईकमान और भाजपा के सभी नेता यही चाहते थे। इस बार भी पार्टी हाईकमान के फैसले को माना है। खेर ने कहा कि न वे किसी ग्रुप में है और न ही गुटबाजी करना चाहती हैं।
मेयर चुनाव तक रखा मौन व्रत
मौजूदा मेयर आशा जसवाल के नामांकन भरने पर पूछे गए सवाल पर खेर ने कहा कि मेयर चुनाव पूरा होने तक वे मीडिया में कोई बयान नहीं देना चाहतीं। मेयर चुनाव पूरा होने तक वे पार्टी के अंदरूनी मामलों को लेकर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहतीं। देवेश मोदगिल को पार्टी हाईकमान ने मेयर कैंडिडेट चुना है। भाजपा के सभी पार्षद अपना कीमती वोट देकर मोदगिल को शहर का अगला मेयर बनाएंगे।