एक के बाद एक पार्षदों से जुड़े कथित ऑडियो वायरल होने से अखबारों में खबरें प्रकाशित होने से मेयर आशा जसवाल ने मीडिया कर्मियों पर ही सवाल खड़ा कर दिया है। मेयर आशा जसवाल ने एसएसपी नीलांबरी जगदले को कहा है कि मीडिया कर्मियों को भी वायरल हो रहे ऑडियो की जांच में शामिल किया जाना चाहिए। मेयर ने एसएसपी को पत्र लिखकर कहा है कि उन्हें पार्षदों ने बताया है कि सभी ऑडियो फर्जी हैं। ऐसे में मीडिया कर्मियों को जांच में शामिल किया जाए ताकि वायरल हो रही रिकार्ड ऑडियो के सोर्स का पता चल सके और पब्लिक के सामने भी इनकी सच्चाई आए।
वहीं मेयर द्वारा लिखे गए इस पत्र की चंडीगढ़ प्रेस क्लब और कांग्रेस पार्टी ने निंदा की है। क्लब के महासचिव के अनुसार मीडियाकर्मी वही रिपोर्टिंग करते हैं जो समाज में होती है। स्त्रोत को उजागर करना मीडियाकर्मी के प्रोफेशन के सिद्धांतों के खिलाफ है। अगर पुलिस और प्रशासन ने मीडियाकर्मियों पर दबाव बनाने का प्रयास किया तो प्रदर्शन किया जाएगा।
कांग्रेस महासचिव एवं पार्षद दवेंद्र सिंह बबला का कहना है कि प्रेस को खबरें प्रकाशित करने का पूरा अधिकार है। कोई भी प्रेस के अधिकार को खत्म नहीं कर सकता है। मेयर ने मीडिया की आजादी पर हमला किया है। नगर निगम में जो भ्रष्टाचार फैला है उसे मेयर पनाह दे रही हैं। वायरल ऑडियो में मेयर को किसने अधिकार दे दिया कि वह अपने ही पार्षदों को क्लीन चिट दे दे, जबकि पुलिस जांच कर रही है।
पत्र में मेयर ने सभी ऑडियो की जांच रिपोर्ट भी मांगी
मेयर ने पत्र में ऑडियो वायरल की जांच जल्द करके रिपोर्ट भी एसएसपी से मांगी है। मेयर ने एसएसपी को कहा कि यह ऑडियो सामने आने से नगर निगम की साख खराब हो रही है। मालूम हो कि अभी तक तीन ऑडियो सामने आई हैं। इसमें तीन अलग-अलग पार्षदों पर आरोप लगे हैं। मेयर ने कहा है कि इस तरह की ऑडियो वायरल होने से वे भी आहत हैं। गौरतलब है कि अभी तक भाजपा पार्षद भरत कुमार और निर्दलीय पार्षद की कथित ऑडियो वायरल हुई है, जबकि दो दिन पहले एक और ऑडियो सामने आई है। इसमें मनीमाजरा के इंदिरा कालोनी के पार्षद पर आरोप लगाए गए हैं।