भाजपा मेयर बनाने के करीब
दरअसल मेयर का चुनाव इस बार प्रत्यक्ष तौर पर हाथ उठाकर होने वाला है। ऐसे में क्रॉस वोटिंग नहीं हो सकती थी तो संख्या बल पूरा करने के लिए भाजपा को 19 पार्षदों की जरूरत थी। मौजूदा समय में सदन में भारतीय जनता पार्टी के 16, आम आदमी पार्टी के 13 और कांग्रेस के 6 पार्षद हैं। उसके अलावा एक सांसद का वोट भी कांग्रेस का है। कुल वोट की संख्या 36 होती है। मेयर बनने के लिए तय मानक के हिसाब से 19 वोट की जरूरत पड़ती है। आम आदमी पार्टी के दो पार्षदों के टूटने के बाद समीकरण बदल गया है। अब भाजपा के 18, आम आदमी पार्टी के 11, कांग्रेस के 6 पार्षद और एक सांसद का वोट है। ऐसे में बीजेपी को अब सिर्फ एक वोट चाहिए और उनका मेयर बनना इस बार लगभग तय है।
दोनों पार्षदों ने कहा-ये घर वापसी जैसा
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जेपी मल्होत्रा ने बताया कि पार्टी की नीतियों और मोदी के नेतृत्व का कमाल है कि लोग दिन प्रतिदिन भाजपा से अपना जुड़ाव बढ़ाते जा रहे हैं। वही आम आदमी पार्टी से भाजपा में शामिल हुई पार्षद सुमन और पूनम दोनों लोगों ने बताया कि वह लोग पहले भी भाजपा में रही है और यह उनके लिए घर वापसी जैसा है।
पूनम ने बताया कि कुछ पारिवारिक हालात ऐसे थे कि उनको आम आदमी पार्टी में जाना पड़ा था जबकि सुमन ने कहा कि उनके पति पहले भी भारतीय जनता पार्टी में रहे हैं और संजय टंडन के साथ लंबे समय तक कार्यकर्ता के तौर पर काम किया था। कुछ हालात ऐसे बन गए थे कि वह आम आदमी पार्टी में चली गई थी लेकिन अब घर परिवार और पार्टी वार्ड के लोगों से चर्चा करने के बाद उन्होंने दोबारा भारतीय जनता पार्टी ज्वाइन की है और उनके साथ बड़ी संख्या में वार्ड के और लोग भी भाजपा की सदस्यता लेंगे।
दरअसल पिछली बार मेयर चुनाव में गुप्त मतदान हुआ था। उस दौरान आप और कांग्रेस के तीन पार्षदों ने क्रॉस वोटिंग करते हुए भाजपा प्रत्याशी हरप्रीत कौर बबला को वोट दिया था। इस बार प्रत्यक्ष वोटिंग होगी। ऐसे में पार्षद क्रास वोटिंग नहीं कर पाएंगे।