गुटबाजी के बीच अब मेयर चुनाव के लिए तीन उम्मीदवार मैदान में हैं। मेयर आशा जसवाल और रवि कांत शर्मा अपना नामांकन वापस नहीं लेते हैं तो मुकाबला त्रिकोणीय होगा। ऐसी स्थिति में खरीद-फरोख्त की संभावना भी बढ़ गई है।
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कांग्रेस ने अपने 4 पार्षदों के दम पर मेयर पद के लिए देवेंद्र सिंह बबला, सीनियर डिप्टी मेयर के लिए शीला फूल सिंह और डिप्टी मेयर पद के लिए रविंदर कौर गुजराल को मैदान में उतारा है। अगर पार्टी आशा जसवाल और रवि कांत शर्मा का नामांकन वापस कराने में कामयाब रही तब भी भाजपा में क्रास वोटिंग होने की संभावना है। अगर मोदगिल का नामांकन वापस करवाती है तो भी क्रास वोटिंग हो सकती है। हालांकि, मोदगिल को अब हाईकमान नामांकन वापस लेने के लिए नहीं कहेगी क्योंकि पार्टी अपने फैसले नाममात्र परिस्थितियों में ही पलटती है।
आशा ने पार्षद से भी इस्तीफा देने की बात रखी झा के समक्ष
पार्टी प्रभारी प्रभात झा ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय टंडन को जिम्मेवारी दी है कि वे आशा जसवाल और रवि शर्मा से मोदगिल के समर्थन में नामांकन वापस दिलवाएं। नामांकन भरने के बाद आशा जसवाल की कुछ नाराज पार्षदों के साथ पार्टी प्रभारी प्रभात झा के साथ बैठक भी हुई। इस बैठक में झा ने मेयर को काफी मनाने का प्रयास किया, लेकिन वह नहीं मानीं। आशा जसवाल ने कहा कि वह मोदगिल को मेयर नहीं कह सकती हैं। इससे अच्छा है कि वह पार्षद के पद से ही इस्तीफा दे दें और वह इसके लिए तैयार भी हैं।
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गेम बिगाड़ और बना सकती है कांग्रेस
Mayor Elections 2018
- फोटो : अमर उजाला
गेम बिगाड़ और बना सकती है कांग्रेस
कांग्रेस पार्टी के पास जीत का आंकड़ा नहीं है। कांग्रेस सिर्फ क्रास वोटिंग के दम पर ही जीत सकती है। अगर कांग्रेस मैदान में डटी रहती है, जिसकी संभावना भी ज्यादा है तो ही भाजपा के मेयर उम्मीदवार देवेश मोदगिल को फायदा मिलेगा क्योंकि भाजपा के कुल 20 पार्षद हैं, जिनमें से 11 पार्षद मेयर आशा जसवाल के समर्थन में हैं, लेकिन इनमें से दो पार्षद मोदगिल के संपर्क में हैं। वह सिर्फ टंडन गुट के दबाव में मोदगिल के समर्थन में नहीं आ रहे हैं। मेयर चुनाव के लिए कुल 27 वोट है, जिनमें से कांग्रेस के 4, अकाली दल का एक, एक निर्दलीय और सांसद का एक वोट है।
ऐसी स्थिति में अगर कांग्रेस भाजपा के बागी उम्मीदवार मेयर आशा जसवाल के समर्थन में नाम वापस लेने की राजनीति कर देते हैं तो मोदगिल के लिए मुश्किल हो जाएगी। ऐसी स्थिति में आशा जसवाल 11 नाराज पार्षदों के समर्थन से 15 वोट हासिल करके जीत सकती है। लेकिन कांग्रेस नाम वापस लेने के लिए तैयार नहीं है क्योंकि कांग्रेसियों को पता है कि अगर वह आशा जसवाल को समर्थन करते भी हैं तो भी आशा जसवाल भाजपा में ही रहेंगी और उन्हें कोई फायदा नहीं मिलेगा।
भाजपा के मेयर उम्मीदवार देवेश मोदगिल के पास सांसद किरण खेर और अकाली दल के एक पार्षद का मत है। यहां तक कि निर्दलीय पार्षद दलीप शर्मा भी मोदगिल के समर्थन में हैं। अगर यह मान भी लिया जाए कि 11 नाराज पार्षद आशा जसवाल को ही वोट करेंगे तो भी भी मोदगिल के पास बाकी बचे पार्षदों और सांसद को मिलाकर 12 वोट हैं। ऐसे में दोनों गुटों में वोटों की सेंधमारी भी होने की उम्मीद है।
मेरे उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। कोई उम्मीदवारों का समर्थन करने के लिए तैयार है तो उसका स्वागत है। मेयर और सीनियर डिप्टी मेयर पद के उम्मीदवार काफी सीनियर और अनुभवी पार्षद हैं, जो शहर की बेहतर सेवा कर सकते हैं। विकास करवाना पार्टी का रिकार्ड भी रहा है। प्रदीप छाबड़ा, कांग्रेस अध्यक्ष, चंडीगढ़
घोसले में छेद हो गया : टंडन
यह जो कुछ भी हुआ है, वह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। एक-एक तिनका जोड़कर बड़ी मेहनत से घोसला बनाया है। आज इस घोसले में छेद हो गया। प्रयास करूंगा कि सभी को इकट्ठा करके पहले जैसा कर सकूं। संजय टंडन, भाजपा अध्यक्ष चंडीगढ़