भाजपा के लिए मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर चुनाव जीतना अहम नहीं है बल्कि उनके लिए क्रास वोटिंग रोकना प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है। इस समय भाजपा चुनाव जीतने में कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन पार्टी चाहती है कि भाजपा, अकाली के साथ साथ सभी मनोनीत पार्षदों का वोट भी उनके प्रत्याशियों को ही मिले।
मनोनीत पार्षदों को भाजपा ने ही बनवाया है। ऐसे में अगर कांग्रेस प्रत्याशियों को 4 से ज्यादा वोट पड़ते हैं तो माना जाएगा कि यह भाजपा की वोट में ही सेंधमारी हुई है। गुटबाजी से ही बचने के लिए भाजपा ने मेयर का उम्मीदवार तय करने में किसी भी पार्षद की सलाह नहीं ली है।
कांग्रेस के पास इस समय सिर्फ 4 ही पार्षद हैं ऐसे में वह जीत के लिए नहीं बल्कि अपनी संख्या 4 से ज्यादा बढ़ाने के लिए प्रयास कर रहे हैं अगर ऐसा होता है तो वह इसे ही अपनी जीत मानेंगे कि उन्होंने भाजपा के अंदरुनी गुटबाजी का परिचय दे दिया। ऐसे में भाजपा को भी इस बात की जानकारी है कि उनके नेताओं में काफी गुटबाजी है। पिछले साल भी मेयर अरुण सूद को पार्टी में अपने ही अधिकतर पार्षदों का सहयोग नहीं मिला था इसलिए सूद को मनोनीत के दम पर ही निगम चलानी पड़ी।
मनोनीत कर सकते हैं मतदान से इंकार
आशा जसवाल
- फोटो : अमर उजाला
मनोनीत कर सकते हैं मतदान से इंकार
ऐसा हो सकता है कि भाजपा खुद ही मनोनीत पार्षदों को वोट डालने के लिए इंकार कर सकते हैं। भाजपा मतदान से पहले सदन में घोषित करवाना चाहती है। ऐसा करके भाजपा यह मैसेज देना चाहती है कि वह अपने दम पर ही मेयर का चुनाव जीत सकते है। जबकि कांग्रेस पिछले 14 साल तक मनोनीत पार्षदों के समर्थन से ही मेयर बनवाती आई है। मालूम हो कि भाजपा के कई सीनियर नेता खुद भी मनोनीत को वोट का अधिकार दिए जाने के खिलाफ रहे हैं। भाजपा के पूर्व पार्षद सतिंदर सिंह ने वोटिंग अधिकार के खिलाफ पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट में अरजी भी दाखिल की हुई है।
किस पार्टी के पास कितने वोट
दल वोट
भाजपा 20
कांग्रेस 4
अकाली 1
निर्दलीय 1
सांसद 1
मनोनीत 9
कुल वोट 36
जीत के लिए चाहिए 19
कौन कौन है उम्मीदवार
भाजपा में मेयर पद के लिए आशा जसवाल, सीनियर डिप्टी मेयर के लिए राजेश गुप्ता और डिप्टी मेयर के लिए अनिल दूबे उम्मीदवार हैं, जबकि कांग्रेस में मेयर पद के लिए गुरबख्श रावत, सीनियर डिप्टी मेयर के लिए शीला फूल सिंह और डिप्टी मेयर पद के लिए रविंदर कौर गुजराल उम्मीदवार हैं।