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चंडीगढ़ से भी दिखता है अफगानिस्तान, पाकिस्तान

Tue, 15 Oct 2013 02:25 AM IST
अरविंद बाजपेयी/चंडीगढ़
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स्क्रिप्ट दीजिए और लोकेशन तैयार। चाहे पुरानी हवेली हो या नदियों का किनारा...फिल्म के डायरेक्टर के लिए सब तैयार वो भी फटाफट। जी हां, यह है सिटी के लाइन प्रोड्यूसरों का कमाल।
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मस्त मलंग यह लाइन प्रोड्यूसर सिर्फ लोकेशन ही नहीं बताते हैं, बल्कि डायरेक्टर के सामने ऐसी मार्केटिंग करते हैं कि सभी उनके इस सिटी के दीवाने हो जाते हैं।

फिर चाहे रणबीर कपूर हों या अमीषा पटेल और निर्देशक सुभाष घई।

मनीष वालिया प्रोडक्शन के लाइन प्रोड्यूसर मनीष वालिया ने कहा कि स्क्रिप्ट मिलने के बाद ही सारा काम शुरू होता है।

स्क्रिप्ट को देखने के बाद डायरेक्टर से सीधी बात की जाती है और फिर जैसी लोकेशन वह कहते हैं वह तलाशते हैं। चंडीगढ़ में गलियां, लव सीन और गीतों के लिए कई लोकेशन महत्वपूर्ण बन चुकी है।
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यहां आर्टिस्टों के ड्रेस का इंतजाम भी खुद करवाना पड़ता है। उन्होंने बताया कि शूटिंग के दौरान कई बार अचानक कई डिमांड आ जाती हैं, उसके लिए एक टीम तैयार रहती है।

लाइन प्रोड्यूसर लाली गिल ने बताया कि जब चंडीगढ़ में लाइन प्रोड्यूसर का काम तक नहीं होता था उसी समय उन्होंने डायरेक्टर हरबख्श लाटा की शोभा शक्ति फिल्म प्रोडक्शन के लिए काम किया।
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यह 1983 में शुरू हुआ। उसके बाद टीवी सीरियल और पंजाबी वीडियो की शुरुआत की गई। लाली गिल ने कहा कि यह आसान काम नहीं है इसके लिए हर जानकारी चाहिए।

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फिल्में
माहौल ठीक है
जोकर
अपने
लकी कबूतर
कमांडो
देसी मैजिक
बेशर्म
वांटेड गुरदासमान डेड आर एलाइव
सुच्चे मोती
वसीयत
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फेवरेट लोकेशन
राक गार्डन-लव सीन और गीत
रोज गार्डन-लव सीक्वेंस के लिए
रोड्स-दौड़ने भागने के सीन
बुड़ैल-गलियां में चेजिंग का सीन
मनीमाजरा-पाकिस्तानी सीन
सेक्टर-15-अफगानिस्तान
सेक्टर-8 की हवेलियां
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प्रमुख लाइन प्रोड्यूसर
लाली गिल  
दर्शन औलख
जरनैल सिंह
मनीष वालिया
रविंदर हैप्पी
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यह होती है टीम
पांच सदस्य
प्रोडक्शन मैनेजर
प्रोडक्शन एसोसिएट
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यह होता है काम
लोकेशन देखना
शूटिंग की परमीशन
होटल की व्यवस्था
वैनटी वैन की जरूरत
गाड़ियों का अरेंजमेंट
ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था
लोकल आर्टिस्ट
भीड़ का इंतजाम
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मेहनताना (शूटिंग)
दस से पंद्रह हजार रुपये
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