कोरोना की वजह से पूरे देश में लगे लॉकडाउन को खत्म हुए भले ढाई साल बीत चुके हैं, लेकिन अब तक पर्यटन इसकी मार झेल रहा है। तमाम प्रयासों के बावजूद पर्यटन दोबारा पटरी पर नहीं लौटा है। यूनाइटेड नेशन डेवलपमेंट प्रोग्राम (यूएनडीपी) ने शहर में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई सुझाव दिए हैं। कहा है कि सिटी ब्यूटीफुल को सिंगापुर से सीखना चाहिए।
यूएनडीपी की तरफ से तैयार किए गए विजन फॉर चंडीगढ़ 2030 डॉक्यूमेंट में सिंगापुर की तर्ज पर सभी पर्यटन स्थलों को जीरो वेस्ट स्पॉट बनाने का सुझाव दिया है। कहा है पर्यटन स्थलों पर प्लास्टिक का बिल्कुल इस्तेमाल न हो। किसी न किसी तरह से पानी को दोबारा इस्तेमाल में लाया जाए। स्थल पर ही गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग किया जाए। स्थानीय लोगों के कमाई के साधन बनाने के लिए कुछ तय जगहों पर दुकानें खोली जा सकती हैं। जहां पेपर बैग, फूड जॉइंट्स, कुछ सांस्कृतिक सामानों आदि को बेचा जाए।
कहा है कि चंडीगढ़ एक हरा-भरा शहर है इसलिए पर्यटन और पर्यावरण को जोड़ा जाए। शहर को एक एडवेंचर स्पोर्ट्स के स्थल के रूप में प्रचारित किया जाना चाहिए। कई स्थानों पर ऐसे स्पॉट बनाए जाएं, जहां एडवेंचर स्पोर्ट्स हो सकें। हेरिटेज फर्नीचरों का एक म्यूजियम भी बनाने का सुझाव दिया। सेक्टर-17 के सौंदर्यीकरण, कैपिटल कांप्लेक्स में शहीदी स्मारक, वायु सेना का विरासत केंद्र आदि का जिक्र किया है।
पर्यटकों के लिए इसलिए खास है सिंगापुर
सिंगापुर में पर्यटन एक प्रमुख उद्योग है। हर साल यहां एक करोड़ से ज्यादा लोग पहुंचते हैं। इसका कारण है कि यहां पर्यटकों के लिए काफी सुविधाएं हैं। यातायात व्यवस्था बहुत अच्छी है और ये करीब-करीब वहां के सभी पर्यटन स्थलों को कवर करती है, जिससे पर्यटकों को घूमने में आसानी रहती है। इसमें यहां का बेहद लोकप्रिय मास रैपिड ट्रांजिट सिस्टम भी शामिल है। शॉपिंग के साथ-साथ खान-पान को भी खास कर पर्यटकों के लिए एक आकर्षण के तौर पर प्रचारित किया जाता है और ये काम आमतौर पर सिंगापुर टूरिज्म बोर्ड या इससे जुड़ी दूसरी संस्थाएं करती हैं। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सिंगापुर पर्यटन बोर्ड पूरे साल विभिन्न तरह के कार्यक्रम आयोजित करता है। इसमें चिंगाए परेड, सिंगापुर आर्ट्स फेस्टिवल और सिंगापुर गार्डन फेस्टिवल शामिल हैं।
सबसे ज्यादा रॉक गार्डन देखने पहुंचते हैं लोग, प्रशासन उसे लेकर गंभीर नहीं
रॉक गार्डन के तीसरे फेज में कई काम होने हैं। 2008 में नेक चंद म्यूजियम बनाने का फैसला हुआ था, जो आज तक नहीं बन पाया है। इसमें नेकचंद के सभी अवॉर्ड, एक लाइब्रेरी, छोटा थिएटर, उनके द्वारा इस्तेमाल किए गए सामान (जो अभी उनके घर में रखे गए हैं), उनकी एक्टिविटी को भी लिखा जाना था, ताकि लोग नेक चंद के त्याग और समर्पण की भावना को समझ पाएं। एग्जिट पार्ट भी अधूरा है। उसे नेक चंद ही बना गए थे, लेकिन वहां पर आर्ट वर्क करना है, जिसकी वजह से वह भी आज तक अधूरा है। अभी लोग जिस गेट से अंदर घुसते हैं, उन्हें पूरा रॉक गार्डन देखने के बाद वापस उसी के पास के गेट से बाहर आना पड़ता है। इसके अलावा झूलों के ऊपर भी कुछ रंग-बिरंगे पौधे लगाने की योजना थी, वह भी अधूरा है। एक्वेरियम बनना है। पद्मश्री नेकचंद के बेटे अनुज सैनी ने बताया कि वर्ष 2016-17 में प्रशासन ने तीसरे फेज का काम शुरू किया लेकिन सिर्फ एक डॉल म्यूजियम ही पूरा कर पाए। उसके बाद काम बंद हो गया।
पर्यटन पर कोरोना की मार अब तक जारी
शहर में कोरोना से पहले हर माह औसतन कुल एक लाख 34 हजार पर्यटक चंडीगढ़ पहुंचते थे, लेकिन अब ये संख्या तीन गुना कम हो गई है। मार्च 2019 में कुल पर्यटक जो 132569 पहुंचे थे, मार्च 2022 में सिर्फ 41 हजार रह गए हैं। शहर में कोरोना से पहले औसतन साढ़े तीन हजार विदेशी पर्यटक हर महीने शहर पहुंचते थे, लेकिन अब यह संख्या 1000 के करीब है।