साल 2015 में भर्ती हुए 1150 जेबीटी-टीजीटी की पर तलवार लटक गई है। भर्ती पूरी तरह निरस्त होगी और पेपर दोबारा लिया जाएगा। यूटी प्रशासन के आधिकारिक सूत्रों की मानें तो 6 सदस्यीय कमेटी ने प्रशासक वीपी सिंह बदनौर को भर्ती रद्द करने की जो सिफारिश की थी, उस पर बदनौर ने अंतिम फैसला ले लिया है। हालांकि, आधिकारिक पुष्टि होनी बाकी है। सुप्रीमकोर्ट की जिस रूलिंग को आधार बनाते हुए प्रशासन इस भर्ती को रद्द करने जा रहा है, उसके मुताबिक पूरी भर्ती रद्द की जाएगी, साथ ही शिक्षकों को दोबारा पेपर देना होगा।
चंडीगढ़ पुलिस के उच्च अधिकारियों की भी मानें तो पुलिस की ओर से भी प्रशासन को इस भर्ती में बड़े स्तर पर धांधली होने के चलते पूरी भर्ती रद्द करने की सिफारिश की गई है। प्रशासन जो अगला कदम उठाने जा रहा है, उसके मुताबिक उन सभी शिक्षकों का दोबारा पेपर होगा, जोकि परीक्षा में पास हो चुके हैं और जिनका अप्वाइंटमेंट भी हो चुका है। दोबारा पेपर लेने में केवल उन शिक्षकों को आवेदन में उम्र में रिलैक्सेशन दिया जाएगा, जोकि इस पेपर में पहले पास हो चुके थे या जिनका मेरिट लिस्ट में नाम था।
बता दें कि यूटी शिक्षा विभाग ने 2015 में जेबीटी व टीजीटी शिक्षकों की भर्ती के लिए कुल 1150 पदों पर आवेदन मांगे थे। जेबीटी व टीजीटी भर्ती में पेपर से तीन दिन पहले ही पेपर लीक का खुलासा हुआ था। जेबीटी व टीजीटी शिक्षकों की भर्ती में 7 से 8 लाख रुपये में पेपर लीक किए गए थे। इस मामले में हाल ही में चंडीगढ़ पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) ने यूटी प्रशासन से अपील कर पूरी भर्ती रद्द किए जाने की अपील की हुई है। जेबीटी-टीजीटी भर्ती घोटाले की अगर बात करें तो हाल ही में एसआईटी ने 17 आरोपियों के खिलाफ जिला अदालत में चार्जशीट फाइल की थी।
यह है मामला
यूटी शिक्षा विभाग में साल 2015 में 1150 जेबीटी और टीजीटी की भर्ती की गई थी। इसके बाद पंजाब विजिलेंस जांच में सामने आया था कि भर्ती के लिए लिखित परीक्षा से तीन दिन पहले ही पेपर परीक्षार्थियों के हाथों में था। इसके लिए दलालों ने परीक्षार्थियों से सात-सात लाख रुपये लिए थे। पंजाब विजिलेंस की पूछताछ में आरोपी दिनेश यादव ने कबूला था कि टीचर भर्ती घोटाले में धांधली हुई है। इसके बाद पंजाब विजिलेंस ने एक रिपोर्ट बनाकर यूटी प्रशासन और पुलिस को भेजी थी और मामले की छानबीन करने को कहा था। शिक्षक भर्ती घोटाले के सामने आने पर यूटी पुलिस ने एसआईटी गठित की थी।
इसका नेतृत्व एसपी रवि कुमार को दिया गया था। यूटी पुलिस ने 29 जुलाई 2016 को इस मामले में केस दर्ज किया था। एसआईटी ने सबसे पहले पंजाब विजिलेंस से गिरफ्तार किए गए आरोपी दिनेश कुमार यादव और प्रदीप लोचन को प्रोडक्शन वारंट पर लाकर उसका चार दिन का रिमांड लिया था। इसके बाद पुलिस टीम ने सह आरोपी सोनीपत निवासी बृजेंद्र नैन को भिवानी से गिरफ्तार किया था। इसके बाद एसआईटी ने कई अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनमें कई सरकारी स्कूलों में टीचर भी शामिल हैं। 17 मई को पंजाब पुलिस ने तेलंगाना पुलिस के साथ मिलकर संजय श्रीवास्तव उर्फ मिथिलेश पांडे और शिव बहादुर को गिरफ्तार किया था।
17 आरोपी हैं घोटाले में
चार्जशीट के मुताबिक दिनेश यादव, प्रदीप लोचव, बिजेंद्र नैन, संपूर्ण सिंह, संदीप, देविंदर, सुशीला राणा, सचिन हुड्डा, सतिंदर हुड्डा, रविंदर बनिया, नरिंदर मलिक, नवीन, शैलेष सिंह, शिव बहादुर, संजय कुमार श्रीवास्तव उर्फ मिथलेश पांडे उर्फ गुरुजी, ललित कुमार और सुखप्रीत सिंह आरोपी हैं।