चंडीगढ़। पंजाब और हरियाणा को छोड़कर बाकी राज्यों से चंडीगढ़ आने वाले वाहनों से 50 प्रतिशत अधिक पार्किंग चार्ज वसूलने की तैयारी है। वीरवार को नई पार्किंग पॉलिसी को लेकर एडवाइजर मनोज परिदा ने एक उच्चस्तरीय बैठक की। इसमें कई बिंदुओं पर शहरवासियों के ऐतराज के बावजूद नई पार्किंग पॉलिसी पर चर्चा उसे प्रशासनिक स्तर पर फाइनल कर दिया गया। अब पॉलिसी अंतिम मुहर के लिए प्रशासक बीपी सिंह बदनौर के पास भेज दी गई है। प्रशासक की अनुमति मिलते ही इसे सिटी में लागू कर दिया जाएगा।
बताते चलें कि कई कमियों के चलते नई पार्किंग पॉलिसी बीते दो साल से अधर में लटकी हुई थी। सिटी में वाहनों के दबाव को कम करने के लिए अब प्रशासन ने नई पार्किंग पॉलिसी को करीब-करीब फाइनल कर दिया है। बता दें कि अमर उजाला ने 18 जुलाई के अंक में ‘शहर में जल्द लागू होगी नई पार्किंग पॉलिसी, हाईलेवल मीटिंग बुलाई’ शीर्षक से खबर प्रकाशित कर लोगों जानकारी दे दी थी कि जल्द ही शहर में नई पार्किंग पॉलिसी लागू की जाएगी।
शहर में बढ़ते ट्रैफिक कंजेशन व पार्किंग की समस्या को देखते हुए यूटी प्रशासन ने पार्किंग पॉलिसी का ड्राफ्ट दो साल पहले तैयार किया था। इसे शहर में लागू करने के लिए लोगों के सुझाव मांगे थे। 191 शहरवासियों ने इस पॉलिसी पर अपनी शिकायत और सुझाव भेजा था। पॉलिसी के कई बिंदुओं पर लोगों ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई थी। इसके बाद पॉलिसी अधर में लटक गई। लेकिन सिटी में कंडम हो रही ट्रैफिक व्यवस्था को देखते हुए अब प्रशासन इसे लागू करने पर विचार कर रहा है। इसी के तहत वीरवार को एडवाइजर ने खुद ही पार्किंग पॉलिसी को लेकर एक उच्चस्तरीय मीटिंग की। इसमें ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट, अर्बन प्लानिंग, इंजीनियरिंग, आर्किटेक्ट, नगर निगम और ट्रैफिक से सभी संबंधित विभागों के सभी अफसरों मौजूद रहे।
मीटिंग में नई पॉलिसी को लागू करने पर सहमति बनी लेकिन इस पर अंतिम निर्णय प्रशासक को ही लेना है। इस लिए फाइल प्रशासक को भेज दी गई है। बताते चलें कि एक हप्ते पूर्व ही एडवाइजर ने ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट को ड्राफ्ट पॉलिसी की कमियों को दूर करने के निर्देश दिए थे। इस संदर्भ में प्रशासन के एक अफसर का कहना है कि पॉलिसी की कमियों को दूर कर लिया गया है। इसके बाद ड्राफ्ट पॉलिसी को शहर में लागू करने करने के लिए फाइल गवर्नर हाउस को भेज दिया गया है। फिलहाल अभी इसे लागू करने में अभी कम से कम दो महीने का समय लग जाएगा।
इन बिंदुओं पर उठी थी आपत्ति
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सभी पर पार्किंग चार्ज बराबर लगे
पार्किंग ड्राफ्ट पॉलिसी के पंजाब और हरियाणा को छोड़कर दूसरे राज्यों की गाड़ियों पर 50 प्रतिशत अधिक पार्किंग फीस लिए जाने के प्रस्ताव पर लोगों ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। लोगों का कहना है कि चंडीगढ़ में पंजाब और हरियाणा के अलावा हिमाचल, उत्तराखंड, जम्मू, यूपी और बिहार से बड़ी तादात में लोग आते हैं। इसके अलावा सैकड़ों की संख्या में यहां बाहरी लोग रह रहे हैं, जिनके पास बाहरी प्रदेशों की ही गाड़ियां मौजूद हैं। ऐसे में उन पर बोझ बढ़ जाएगा, इसलिए सभी से बराबर पार्किंग चार्ज लिया जाए।
दूसरी गाड़ी लेने पर 50 प्रतिशत अधिक रोड टैक्स पर भी आईं आपत्तियां
पॉलिसी में 10 लाख रुपये से ऊपर की दूसरी गाड़ी लेने पर ओनर्स को 50 प्रतिशत अतिरिक्त रोड टैक्स देने पर भी लोगों ने आपत्ति जताई है। लोगों का कहना है कि ऐसे में तो लोग दूसरे के नाम से वाहन ले लेंगे। इस प्वाइंट का पॉलिसी में कोई मतलब नहीं है। इसलिए इसे हटाने का निर्णय लिया जाए।
कंपनियों के लिए स्टाफ बस की अनिवार्यता पर भी उठे सवाल
शहर में 50 से अधिक इंप्लाइज वाली कंपनी में स्टाफ बस का प्रावधान किए जाने पर भी लोगों ने असहमति जताई है। ड्राफ्ट में शामिल इस प्वाइंट पर कई कंपनियों को ऑब्जेक्शन है। इनका कहना है कि हर इंप्लाइज को ट्रांसपोर्ट अलाउंस दिया जाता है, इसके अलावा महिला कर्मचारियों के लिए कैब सर्विस भी शुरू की है। कंपनियों ने इस कंडीशन को बदलने के लिए कहा है।
पार्किंग पॉलिसी के इन बिंदु़ओं पर लगी मुहर
- पॉलिसी लागू होने के बाद वाहन मालिकों को तीन महीने के अंदर यह एफिडेविट देना होगा कि वे पॉलिसी के नियमों का पालन करेंगे।
- चंडीगढ़ में गाड़ी खरीदने, चलाने और रजिस्टर्ड कराने के लिए सर्टिफिकेट आफ एंटाइटलमेंट देना होगा जोकि 10 साल के लिए वैलिड होगा।
-21 जनवरी 2015 को प्रशासन की ओर से नियम जारी किए गए थे, उन नियमों का शहर के सभी स्कूल, कॉलेज और अन्य संस्थानों को पालन करना होगा।
-जिन लोगों के पास गाड़ी नहीं है और उनके घर में पार्किंग एरिया है, वह अपने पार्किंग एरिया को किराए पर देकर कमाई कर सकते हैं।
- घर में पहले से अगर गाड़ी है और आप दूसरी गाड़ी खरीद रहे हैं, जिसकी कीमत 10 लाख रुपये से ऊपर है, तो आपको गाड़ी की 50 प्रतिशत कीमत रोड टैक्स देनी होगी।
-शहर के सभी स्कूल, कॉलेज, सरकारी व प्राइवेट संस्थानों को पिकअप और ड्रॉप ऑफ जोन डिक्लेयर करने होेंगे। जहां पर स्कूल के बच्चों को छोड़ा जाएगा और वहां से ले जाया जाएगा।