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प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर बनाकर नहीं देगा चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड, लोगों को सलाह, लोन लें

Fri, 05 Feb 2021 10:05 AM IST
निवेदिता वर्मा रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
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चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड। - फोटो : फाइल फोटो
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केंद्र सरकार की ‘प्रधानमंत्री आवास योजना-अर्बन हाउसिंग फॉर ऑल’ योजना के तहत चंडीगढ़ में जो लोग इस इंतजार में बैठे हैं कि प्रशासन मकान बनाकर उन्हें सौंपेगा, उनके लिए बुरी खबर है। यूटी प्रशासन शहर में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत एक भी घर बनाकर नहीं देगा। प्रशासन ने केंद्र सरकार से इसकी मंजूरी ले ली है। जो सफल आवेदक हैं, उन्हें चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड द्वारा ऋण लेने की सलाह दी जाएगी। 

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इस योजना के तहत शहर भर में करीब सवा लाख लोगों ने आवेदन किया था, जिनमें से प्रशासन ने छंटनी के दौरान 10,132 लोगों को सफल पाया था। इसके बाद कई तरह के सर्वे किए और फिर चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड ने 444 लोगों की आखिरी सूची जारी की। सीएचबी को इन परिवारों को योजना के तहत मकान बनाकर देना था। पिछले करीब डेढ़ साल से ये लोग पक्की छत के इंतजार में बैठे थे। 

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हाउसिंग बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि चंडीगढ़ में जमीन कम है और जो जमीन बोर्ड के पास है, उसका दाम काफी ज्यादा है। चंडीगढ़ प्रशासन ने केंद्र को पत्र भेजकर इस योजना के लिए 3.1 करोड़ रुपये प्रति एकड़ की दर पर जमीन की मांग की थी, लेकिन केंद्र ने प्रशासन की मांग को ठुकराते हुए जमीन को बाजार दर से कम पर देने से इनकार कर दिया था।

ऐसे में प्रशासन ने हाथ खड़े कर दिए हैं और अब इन आवेदकों को भी क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी स्कीम (सीएलएसएस) में ही विलय कर दिया जाएगा। पोर्टल पर सफल आवेदकों के प्रार्थना पत्र की स्थिति को भी बदलने के लिए बोर्ड प्रक्रिया शुरू करने जा रहा है।

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अब तक 1294 लोगों ने चंडीगढ़ में खरीदा है मकान 

क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी योजना के तहत अब तक शहर में 1294 लोगों ने मकान खरीदा है। केंद्र सरकार ने योजना के लिए चंडीगढ़ को पहले 4000 का लक्ष्य दिया था, जिसे फिर कम कर दिया गया। दरअसल, इस योजना के तहत जहां मकान खरीदा जाता है, उस व्यक्ति को उस राज्य व केंद्र शासित की योजना में गिना जाता है।

उदाहरण के तौर पर अगर कोई व्यक्ति चंडीगढ़ में रहता है और योजना के तहत चंडीगढ़ से ही लोन लेकर जीरकपुर या मोहाली में मकान खरीदता है तो वह पंजाब राज्य का लाभार्थी माना जाएगा, न कि चंडीगढ़ का। चंडीगढ़ में जमीन महंगी है, इसलिए सरकारी कर्मचारी भी जीरकपुर, मोहाली, पंचकूला, डेराबस्सी आदि में ही मकान खरीदते हैं। ऐसे में चंडीगढ़ ने यह मुद्दा केंद्र के सामने उठाया और फिर चंडीगढ़ के लक्ष्य को 1000 कर दिया गया है। 

इन वर्ग को मिल रही है आर्थिक सहायता 
  • ईडब्ल्यूएस : पारिवारिक आय तीन लाख प्रतिवर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए। यह छह लाख रुपये तक के 20 साल के लिए गए ऋण के लिए होगी।
  • लो इनकम ग्रुप (एलआईजी): पारिवारिक आय तीन लाख से अधिक नहीं होनी चाहिए। इसमें भी 20 साल के लिए छह लाख रुपये तक के ऋण पर आर्थिक सहायता मिलेगी।
  • मिडल इनकम ग्रुप (एमआईजी-1) : वार्षिक पारिवारिक आय छह से 12 लाख तक होनी चाहिए। इसमें 20 साल के लिए नौ लाख रुपये के ऋण पर 5.40 लाख रुपये तक ब्याज पर आर्थिक सहायता मिलेगी। 
  • मिडल इनकम ग्रुप (एमआईजी-2) : परिवार की वार्षिक आय 12 से 18 लाख रुपये तक होनी चाहिए। 20 साल के लिए 18 लाख रुपये तक के लोन पर 5.28 लाख रुपये के ब्याज पर आर्थिक सहायता का लाभ मिल जाएगा। 

लाभार्थी विभिन्न वर्गों में ले सकते हैं ऋण 
चंडीगढ़ में जमीन की काफी कमी है। इसलिए प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान बनाकर नहीं दिए जाएंगे। हालांकि जिन्हें इस योजना का लाभ मिलना था, उन्हें विभिन्न कैटेगिरी में लोन की सुविधा दी जा रही है। इसके लिए जागरूकता शिविर भी लगाए गए हैं। केंद्र सरकार से चंडीगढ़ को एक हजार लोगों का लक्ष्य मिला था, हमने उस लक्ष्य को भी पूरा कर लिया है। - यशपाल गर्ग, सीईओ, चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड 

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