पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने किसानों के दिल्ली कूच को रोकने के लिए छह माह पहले बंद किए गए शंभू बॉर्डर को एक सप्ताह में खोलने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद कहा कि यह बॉर्डर पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और जम्मू-कश्मीर के बीच नागरिकों की आवाजाही के लिए जीवन रेखा है। इसे बंद रखने की अनुमति नहीं दी जा सकती। हरियाणा सरकार को जाग जाना चाहिए, शंभू बॉर्डर को हमेशा के लिए बंद नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने दोनों राज्यों को यह सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया कि कानून-व्यवस्था बनी रहे तथा राजमार्ग को उसके मूल गौरव पर बहाल किया जाए। न्यायालय ने किसान संघ को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि वे कानून का पालन करें।
यह है मामला
एमएसपी की गारंटी की मांग को लेकर किसान दिल्ली कूच करना चाहते थे। उन्हें रोकने के लिए हरियाणा सरकार ने शंभू बॉर्डर पर हाईवे को पूरी तरह बंद कर रूट डायवर्ट कर दिया। किसानों ने कई बार बैरिकेडिंग तोड़ने की कोशिश भी की, लेकिन पुलिस ने आंसू गैस के गोले, रबड़ बुलेट और लाठीचार्ज कर उन्हें खदेड़ दिया। खनौरी बॉर्डर पर पंजाब के किसान शुभकरण की गोली लगने से मौत भी हो गई। किसान 6 माह से शंभू और खनौरी सीमा पर डटे हैं। हरियाणा की ओर से हाईवे बंद कर देने से आसपास के लोगों और व्यापारियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
शुभकरण की मौत शॉटगन की गोली से हुई पुलिस नहीं करती इसका इस्तेमाल : हाईकोर्ट
किसान आंदोलन के दौरान 21 फरवरी को हुई पंजाब के किसान शुभकरण की मौत के मामले में फॉरेंसिक रिपोर्ट के अनुसार उसकी मौत शॉटगन की गोली से हुई है। हाईकोर्ट ने कहा कि यह हथियार पुलिस इस्तेमाल नहीं करती। इस मामले की जांच को जरूरी मानते हुए हाईकोर्ट ने एसआईटी के गठन का आदेश दिया है।
याचिकाकर्ता उदय प्रताप सिंह ने हाईकोर्ट को बताया था कि आंदोलन के दौरान हरियाणा पुलिस ने अत्यधिक बल का प्रयोग किया था। इस कारण ही शुभकरण के सिर में गोली लगने से मौत हुई थी। हाईकोर्ट ने न्यायिक आयोग का गठन करते हुए जस्टिस जयश्री ठाकुर की अध्यक्षता में इसकी जांच का आदेश दिया था। आयोग ने बताया था कि शुभकरण की मौत हरियाणा के क्षेत्राधिकार में हुई थी। बुधवार को अदालत में फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट पेश की गई। इसमें बताया गया कि यह अत्यधिक संभावना है कि गोली शॉटगन से दागी गई थी।