चंडीगढ़ में अस्थमा के मरीज दिल्ली से ज्यादा हैं। चिंता की बात यह है कि यह मर्ज बड़ों की तुलना में बच्चों को ज्यादा चपेट में ले रहा है। ग्लोबल अस्थमानेटवर्क स्टडी में इसकी पुष्टि हुई है, जिसमें चंडीगढ़ समेत देश के 9 प्रमुख शहरों को शामिल किया गया था। इस अध्ययन में पाया गया कि प्रदूषण की दृष्टि से बेहद खराब माने जाने वाले दिल्ली की स्थिति चंडीगढ़ से बेहतर है। इस अध्ययन में देश के प्रमुख 15 शोध संस्थानों में से एक पीजीआई भी शामिल रहा। इस अध्ययन को यूरोपियन रिस्पेरेटरी सोसायटी जरनल में प्रकाशित किया गया है।
इस अध्ययन में नौ शहरों (बीकानेर, चंडीगढ़, दिल्ली, जयपुर, कोलकाता, कोट्टयम, मैसूर, लखनऊ और पुणे) के बच्चों और उनके माता-पिता को शामिल किया गया। सबसे एक लिखित प्रश्नावली भरवाई गई, जिसमें उनके मर्ज के अलग-अलग स्तर के लक्षणों के आकलन के साथ ही उसे बढ़ाने वाले कारकों से जुड़े सवाल पूछे गए। इसमें खांसी, घरघराहट, गंभीर अस्थमा को वर्गीकृत किया गया। वहीं घर और बाहर के परिवेश को भी इसके कारणों के रूप में समाहित किया गया।
इस अध्ययन में पीजीआई के एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर की पूर्व प्रोफेसर मीना सिंह (मौजूदा समय में ऋषिकेष एम्स की निदेशक) शामिल हैं। उनके अनुसार, बच्चों में बड़ों की तुलना में अस्थमा का खतरा ज्यादा पाया जाना गंभीर बात है। इसे लेकर माता-पिता को सचेत रहने की जरूरत है। बच्चों को शुरू से ही पोषक आहार, व्यायाम, संतुलित जीवनचर्या से संबंधित जानकारी देना जरूरी है।
देश में स्थिति गंभीर
अध्ययन से यह बात सामने आई है कि अस्थमा से दुनियाभर में होने वाली मौतों के अनुपात में भारत में इसका तीन गुना अधिक है। पीजीआई सामुदायिक चिकित्सा विभाग के प्रो. जेएस ठाकुर का कहना है कि अस्थमा गैर संचारी रोग के रूप में एक प्रमुख समस्या है। इस पर काबू के लिए व्यापक स्तर पर काम करने की जरूरत है। जहां तक चंडीगढ़ में इसके स्तर की बढ़ने की बात है तो उसके लिए एक साथ कई कारक जिम्मेदार हो सकते हैं।
चंडीगढ़ में गाजर घास बढ़ा रही अस्थमा
चंडीगढ़ में गाजर घास की अधिकता भी एलर्जी, अस्थमा, बुखार और एक्जिमा जैसी बीमारियां का कारण बन रही है। गाजर घास जिसे कृषि वैज्ञानिक पार्थेनियम हिसटेरोफोरस के नाम से पुकारते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह घास भी अस्थमा और एलर्जी का एक मुख्य कारण है।
अस्थमा फॉर ऑल पर करना होगा काम
पल्मोनोलॉजी, क्रिटिकल केयर एंड स्लीप स्टडीज के विशेषज्ञ डॉ. जफर अहमद ने बताया कि अस्थमा एक प्रमुख गैर-संचारी रोग (एनसीडी) है और यह हर साल दुनिया भर में 3.4 करोड़ से अधिक रोगियों को प्रभावित करता है। ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज द्वारा किए गए एक अध्ययन के अनुसार, भारत में वैश्विक बोझ का 13% से अधिक और विश्व स्तर पर 42% अस्थमा से होने वाली मौतों का रिकॉर्ड है। इसके अलावा, हाल के वर्षों में बच्चों में अस्थमा के मामलों में भी तेजी से वृद्धि देखी गई है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष के कार्यक्रम का विषय अस्थमा केयर फॉर ऑल है।
अस्थमा के लक्षण आप भी जान लें
शारीरिक कार्य करने की क्षमता कम होना
स्लीप पैटर्न की समस्या
सीने में जकड़न या दर्द महसूस होना
सांस छोड़ने के दौरान घरघराहट (विशेषकर बच्चों में)
खांसी आना
खुजली या आंखों से पानी निकलना
छींक आना
चकत्ते
साइनस
कारणों पर करें गौर
पराग - आमतौर पर मौसमी या एक निश्चित भूगोल में
डेंडर - पालतू जानवरों के साथ रहने पर त्वचा के गुच्छे
मोल्ड - मोल्ड के बीजाणु आमतौर पर अंधेरे, नम, स्थानों में मौजूद होते हैं
धूल के कण - छोटे कण जो कालीनों और कपड़ों या उनके मल में रहते हैं
तिलचट्टे और उनके शरीर के अंग या स्राव
ठंडी शुष्क हवा
धूम्रपान करना
रसायन
कुछ इत्र
बचाव के लिए क्या करें
स्वस्थ आहार लें, वजन पर नियंत्रण रखें, धूम्रपान छोड़ दें, नियमित रूप से व्यायाम करें, तनाव प्रबंधन, इन्फ्लूएंजा और निमोनिया के लिए टीका लगवाएं
चंडीगढ़ के 6-7 साल के बच्चों में स्थिति गंभीर
शहर शामिल बच्चे घरघराहट वाले 12 महीने से खांसी वाले गंभीर अस्थमा से ग्रस्त
नई दिल्ली 2516 3.46 प्रतिशत 22.85 प्रतिशत 0.76 प्रतिशत
चंडीगढ़ 2471 8.54 प्रतिशत 31.57 प्रतिशत 1.17 प्रतिशत
बीकानेर 2600 0.35 प्रतिशत 1.23 प्रतिशत 0.04 प्रतिशत
जयपुर 2295 2.35 प्रतिशत 19.87 प्रतिशत 0.78 प्रतिशत
लखनऊ 2989 1.11 प्रतिशत 6.74 प्रतिशत 0.47 प्रतिशत
पुणे 2404 2.08 प्रतिशत 19.8 प्रतिशत 0.17 प्रतिशत
मैसूर 2730 2.75 प्रतिशत 10.33 प्रतिशत 1.39 प्रतिशत
अभिभावकों में भी अनुपात ज्यादा
शहर शामिल घरघराहट की शिकायत गंभीर अस्थमा
कोट्टयम 6940 6.02 प्रतिशत 2.16 प्रतिशत
नई दिल्ली 9449 0.88 प्रतिशत 0.29 प्रतिशत
चंडीगढ़ 10386 3.92 प्रतिशत 1.14 प्रतिशत
बीकानेर 10495 1.59 प्रतिशत 0.24 प्रतिशत
जयपुर 8933 5.84 प्रतिशत 1.94 प्रतिशत
लखनऊ 11820 1.55 प्रतिशत 0.57 प्रतिशत
पुणे 7999 3.89 प्रतिशत 1.16 प्रतिशत
मैसूर 11178 3.43 प्रतिशत 1.61 प्रतिशत
कोलकाता 4096 5.03 प्रतिशत 2.08 प्रतिशत