स्वच्छ सर्वेक्षण 2018 में चंडीगढ़ ने बाजी मारते हुए तीसरा रैंक हासिल किया है। आइए हम बताते हैं, इसके पीछे की 10 बड़ी वजह। यह शहरवासियों के लिए खुशी की बात है क्योंकि पिछले साल चंडीगढ़ रैंकिंग में 11 वें स्थान पर था। उस समय नगर निगम की जमकर किरकिरी हुई थी। रैंकिंग सुधरने में नगर निगम के साथ साथ शहरवासियों ने अहम योगदान दिया है क्योंकि पिछली बार नगर निगम फीडबैक की कैटेगरी में पिछड़ गया था लेकिन इस बार नगर निगम ने लोगों को जोड़ते हुए फीडबैक बढ़ाया और ज्यादा से ज्यादा लोगों को स्वच्छता एप डाउनलोड करवाया।
अब लोग अपने आसपास की गंदगी की तस्वीरें खींचकर इस एप के माध्यम से नगर निगम को भेज रहे हैं। मालूम हो कि साल 2016 में इस प्रतियोगिता में चंडीगढ़ को टॉप-2 का अवार्ड मिला था।अब तीसरे नंबर पर आने पर इसी माह शहरी विकास मंत्रालय की ओर से दिल्ली में कार्यक्रम का आयोजन होगा। स्वच्छ सर्वेक्षण में तीसरा स्थान हासिल करने पर प्रशासक वीपी सिंह बदनौर, सलाहकार परिमल राय, गृह सचिव ने मेयर और कमिश्नर को बधाई दी है। जबकि चंडीगढ़ ने देश भर में यूटी और राजधानी में सबसे साफ सुथरा होने का भी अवार्ड प्राप्त किया है।
जबकि केंद्र शासित प्रदेशों में चंडीगढ़ को सबसे साफ सुथरा शहर घोषित किया गया है। स्वच्छ सर्वेक्षण प्रतियोगिता के लिए कुल 4203 शहरों का सर्वे किया गया था। केंद्र सरकार के अनुसार यह सर्वे 4 जनवरी से 10 मार्च तक चला था। चंडीगढ़ ने 400 शहरों में से तीसरा स्थान हासिल किया है। केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने दिल्ली में टाप-3 शहरों की घोषणा की है। इसमें पहले स्थान पर इंदौर और दूसरे स्थान पर भोपाल रहा है। चंडीगढ़ के पास खुले में शौच से मुक्त सिटी का खिताब पहले से प्राप्त है। साल 2015 में चंडीगढ़ नगर निगम का 21 वां स्थान रहा था। मालूम हो कि शहर की सफाई व्यवस्था पर हर माह नगर निगम का करीब 10 करोड़ रुपये का खर्चा आता है।
सांसद का ट्वीट-वेल्डन चंडीगढ़
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सांसद किरण खेर ने भी स्वच्छता सर्वे में शहर की रैंकिंग सुधरने पर बधाई दी है। उन्होंने ट्वीट करके कहा है कि मुबारक हो चंडीगढ़। हम भारत के सबसे साफ शहरों में तीसरे नंबर हैं। वेल्डन कीप इट अप।
इन माप दंडों की जांच के बाद शहर को मिला तीसरे नंबर का अवार्ड
सफाई का इंफ्रास्ट्रक्चर और सर्विस लेवल
. . शहर में लोगों के पब्लिक टायलेट की व्यवस्था
. घरों में बने हुए टायलेट
. ओपन में शौच को रोकना, शहर के सोल्डि वेस्ट मैनेजमेंट की व्यवस्था
. लोगों को सफाई के प्रति जागरूक करना और उनके व्यवहार में बदलाव करना
. सफाई की व्यवस्था, डोर टू डोर गारबेज इकट्ठा करना और कूड़े को ले जाने के लिए ट्रांसपोर्ट व्यवस्था का इस्तेमाल करना
. कूड़े को प्रोसेस करने की व्यवस्था
. शहरवासियों की फीडबैक
रैंकिंग सुधारने के लिए क्या क्या किया
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- फोटो : अमर उजाला
. लोगों को स्वच्छता एप ज्यादा से ज्यादा डाउनलोड करवाया गया। एप डाउनलोड करने वालों को दिसंबर माह में पेड पार्किंग में निशुल्क सुविधा दी गई।
. नगर निगम कमिश्नर जितेंद्र यादव और अतिरिक्त कमिश्नर सौरभ मिश्रा ने स्कूलों और कालेजों में जाकर जागरूक किया।
. सूखा और गीला कचरा अलग अलग इकट्ठा करने की आदत डालने के लिए निशुल्क डस्टबिन बांटे गए। हालांकि अभी शहरवासियों में यह आदत पैदा नहीं हुई है।
. बाजारों में रात को नाइट स्वीपिंग का काम शुरू किया गया
. लोगों को जागरूक करने के लिए शहर के पब्लिक टायलेट्स की भी अधिकारियों और मेयर ने सफाई की
. इसके साथ ही सफाई कर्मचारियों ने भी साथ दिया। कर्मचारी यूनियन ने कोई हड़ताल नहीं की
. गारबेज प्लांट में शहर का ज्यादा से ज्यादा कचरा प्रोसेस के लिए जाए इसके लिए व्यवस्था की गई
. स्वच्छता एप पर शिकायत आने पर एक से दो घंटे के भीतर गंदगी को दूर कर दिया जाता था। काम न करने वाले कर्मचारियों पर कार्रवाई का प्रावधान रखा गया।
मेयर देवेश मोदगिल का कहना है कि यह खुशी की बात है कि चंडीगढ़ की रैंकिंग में भारी सुधार हुआ है। 11 वें से तीसरे स्थान पर पहुंचना गर्व की बात है। इसके लिए नगर निगम के कर्मचारियों ने काफी मेहनत की। शहरवासी बधाई के पात्र हैं। स्वच्छ भारत मिशन के तहत लोगों ने काफी सहयोग दिया।