चंडीगढ़ के लिए खुशखबरी है। जनवरी 2019 तक चंडीगढ़ देश का ऐसा शहर बनने वाला है, जहां कोयले से बनने वाली बिजली बीते जमाने की बात हो जाएगी। फिलहाल छतों पर सोलर पैनल लगाने के मामले में चंडीगढ़ देश का नंबर शहर बन चुका है। अभी यहां करीब 70 फीसदी बिजली का प्रयोग सोलर एनर्जी से हो रहा है। प्रशासन द्वारा साल के अंत तक इस आंकड़े को सौ फीसदी करने का दावा किया जा रहा है। सोलर एनर्जी के क्षेत्र में शहर को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में चंडीगढ़ सोलर पावर एनर्जी की तरफ आम लोगों को जागरूक करने के साथ ही उन्हें ज्यादा से ज्यादा जोड़ा जा रहा है।
चंडीगढ़ रिन्युअल एनर्जी साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी (क्रेस्ट) की ओर से इस दिशा में शहर में 22 मेगावाट का सोलर प्लांट लगवाया गया है, जिसकी लागत लगभग 142 करोड़ है। केंद्र सरकार की मदद से इसे 2022 तक इसे बढ़ाकर 60 मेगावाट तक पहुंचाने का लक्ष्य है। विभागीय अधिकारियों की मानें तो लक्ष्य को समय पर पूरा कर लिया जाएगा। जानकारी के मुताबिक शहर के सभी स्कूल, कॉलेज और सरकारी इमारतों पर सोलर पैनल लगवाने के काम लगभग पूरा किया जा चुका है। जहां कहीं बाकी है, वहां पर तेजी से काम चल रहा है।
खेर का प्रयास ला रहा है रंग
चंडीगढ़ को देश का पहला सोलर सिटी बनाने के लिए सांसद किरण खेर काफी प्रयास कर रही हैं। खेर ने बताया कि वह हर हाल में शहर को साल के अंत तक सोलर एनर्जी के मामले में देश का नंबर एक शहर बनाना चाहती हैं जिससे चंडीगढ़ दूसरे राज्यों के लिए एक मिसाल बन सके। इसके लिए सांसद ने ट्वीटर पर लोगों से अपनी बात को साझा भी किया है।
लक्ष्य पूरा कर लेंगे
उधर, क्रेस्ट के डायरेक्टर देवेंद्र दलाई का कहना है कि हम सरकार की मंशा के अनुरूप हम काम कर रहे हैं। छतों पर सोलर पैनल लगवाने के मामले में शहर देश में सबसे आगे है। जो लक्ष्य मिला है, उसे इस साल के अंत तक पूरा कर लेंगे।