चंडीगढ़ की 13 साल की छात्रा आरुषि ने लॉकडाउन का बेहतरीन इस्तेमाल किया और एक किताब लिख डाली। लॉकडाउन के दौरान वह ऑनलाइन फ्रेंच भाषा सीख रही थी। इसी दौरान उसके दिमाग में एक कहानी की रुपरेखा बनने लगी। आरुषि ने उसे शब्दों में ढाला और अपनी पहली किताब 'द मिस्टीरियस बुक' लिख डाली।
आरुषि ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान वह ऑनलाइन फ्रेंच भाषा सीख रही थी। इसी दौरान उसके दिमाग में फ्रेंच लड़की जूलियट मार्टन की कहानी चलने लगी। आरुषि ने इस कहानी के पात्रों को शब्दों में ढालना शुरू किया। लगभग छह माह के बाद वह कहानी को किताब का रूप दे पाई। किताब का शीर्षक ‘द मिस्टीरियस बुक’ है।
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आरुषि ने बताया कि उनकी कहानी की मुख्य पात्र जूलियट मार्टन है। उनकी नायिका अधिवक्ता बनना चाहती है, लेकिन परिजन उसके विचार से खुश नहीं होते हैं। एक दिन वह पुस्तकालय में एक किताब पढ़ रही होती है तो अचानक उसका ध्यान किताब के बीच में से मुड़े हुए पेजों पर जाता है। किताब की कहानी और उसमें दिए गए चित्र आपस में मेल भी नहीं खाते हैं।
इसके बाद वह उस किताब की कहानी के बारे में खोजबीन करने में जुट जाती है। जूलियट के किताब का रहस्य पता लगाने पर ही किताब आधारित है। आरुषि आठवीं कक्षा में पढ़ती हैं। किताब लिखने से पहले वह स्कूल प्रतियोगिताओं के लिए कविताएं भी लिखती रही हैं। आरुषि ने बताया कि उनके दोस्त किताब पढ़ने को लेकर काफी उत्साहित हैं। आरुषि के पिता राजेंद्र सिंह पेशे से पत्रकार और माता पुष्पा सिंह गृहिणी हैं।