ये है कारण
पंजाब की एक्साइज पॉलिसी का चंडीगढ़ पर ऐसा असर पड़ा है कि साल-दर-साल ठेकों के दाम बढ़ने के बजाय कम हो गए। उदाहरण के लिए धनास के ठेके का ही रिजर्व प्राइज पिछले तीन साल में 2.81 करोड़ रुपये कम हो गया है। इसका कारण धनास के पास मुल्लांपुर बैरियर पर ही ठेका है। बोतलों के दामों में भी ज्यादा अंतर नहीं है, इसलिए लोग वहीं से खरीद लेते हैं। पलसोरा का ठेका भी जो कभी 12 करोड़ का बिकता था, अब 10 करोड़ तक पहुंच गया है।
वहीं, कलेर वाइंस के दर्शन सिंह कलेर ने कहा कि लगातार चंडीगढ़ के ठेके अनसोल्ड जा रहे हैं, लेकिन अधिकारी हकीकत को स्वीकार करने को तैयार नहीं है। शराब विक्रेता कई समस्याओं से परेशान हैं।
पंजाब की इस नीति से चंडीगढ़ का बिजनेस हिला
पंजाब में एक्साइज और वैट एक फीसदी है, जबकि चंडीगढ़ में एक्साइज ड्यूटी कम से कम 66 रुपये प्रति प्रूफ लीटर से 377 रुपये प्रति प्रूफ लीटर है। वैट 12.50 फीसदी है। इसकी वजह से पंजाब के शराब विक्रेताओं को ज्यादा मार्जिन बचता है, लेकिन चंडीगढ़ में ऐसा नहीं हो पाता। हालांकि ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए पंजाब में चंडीगढ़ से थोड़ी महंगी ही शराब बिक रही है। इसकी वजह से कई ठेकेदार चंडीगढ़ के बजाय पंजाब में जाकर काम करने लगे हैं। कइयों ने बोलियों में भी हिस्सा लेना बंद कर दिया है।
2023-24 में पहली बोली में अधिकतर ठेके रह गए थे अनसोल्ड
वर्ष 2023-24 में ठेकों की पहली बोली में 50 प्रतिशत से अधिक ठेकों के लिए कोई बोलीदाता ही नहीं मिला था। 95 ठेकों में से सिर्फ 43 ही बिके। 2024-25 में एक्साइज विभाग ने 97 ठेकों की नीलामी कर करीब 1000 करोड़ कमाने का लक्ष्य रखा था, लेकिन सिर्फ 89 ठेके ही बिके। बाद में 4 ठेके बंद भी हो गए। ऐसे में एक्साइज विभाग को 743 करोड़ की ही आमदनी हुई थी।