इस तरह तैयार हुआ ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार
दुनियाभर में भूकंप आते हैं। इससे जनहानि व आर्थिक नुकसान होता है। भूकंप ने कई देशों के बड़े-बड़े शहर तबाह कर दिए हैं। उसके बाद जमीन के अंदर की स्थिति के बारे में पता लगाने का प्रयास शुरू हुआ। इसके लिए वैज्ञानिकों की टीम ने 12 फरवरी 1935 को इंग्लैंड के रॉबर्ट एलेक्जेंडर वाटसन की ओर से तैयार किए गए रडार की स्टडी की।
रेडियो तरंगों के जरिए किसी चीज की वस्तु स्थिति का पता लगाया जा सकता है, उसी तरह जमीन का भी पता लगाने के प्रोजेक्ट पर वैज्ञानिकों ने काम किया। 1929 में वैज्ञानिक डब्ल्यू स्टर्न ने ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार का उपयोग किया और ग्लेशियर की गहराई को मापा। 1970 के दशक तक इस क्षेत्र में और विकास हुए। 1972 में अपोलो-17 मिशन ने चंद्रमा के चारों ओर कक्षा में एल्स नामक एक ग्राउंड रडार बनाया। यह 1.3 किमी तक की गहराई तक की जानकारी कर लेता है।
विभाग की ओर से ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार खरीदी गई है। यह रडार जमीन का एक्स-रे करेगी। रिसर्च के लिए यह काफी काम आएगी। साथ ही सरकारी प्रोजेक्ट आदि के लिए भी काम लिया जा सकेगा। भविष्य में चंडीगढ़ की जमीन का हाल भी जानने की इच्छा है। इस पर काम करेंगे। - डॉ. महेश ठाकुर, भूगर्भ विज्ञान विभाग, पंजाब यूनिवर्सिटी