ऑडिट रिपोर्ट में चंडीगढ़ के इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट की कार्यप्रणाली में कई तरह की अनियमितताएं सामने आईं हैं। आप भी देख लीजिए ये स्पेशल रिपोर्ट। डिपार्टमेंट ने मकानों की रेनोवेशन और कई दूसरे कामों के लिए स्वीकृत लागत से लगभग 50 लाख रुपये अधिक खर्च कर दिए। इतना ही नहीं करीब 55 लाख रुपये के लिए तो कंपीटेंट अथॉरिटी से मंजूरी तक नहीं ली गई।
अपने स्तर पर ही यह राशि खर्च कर दी। ऑडिट रिपोर्ट में सामने आई डिपार्टमेंट की कारगुजारी पर सीनियर ऑडिट अफसर ने डिपार्टमेंट से जवाब भी मांगा है। यह खेल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट की इलेक्ट्रिकल डिवीजन नंबर-2 में सामने आया है। इसी डिवीजन के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर ऑफिस ने 2014-15 में विभिन्न कामों के लिए स्वीकृत लागत से अलग करीब 50 लाख रुपये का अतिरिक्त खर्च कर दिए।
इसी डिवीजन का 2013-14 में भी इसी तरह का मामला सामने आ चुका है। एक अधिकारी ने बताया कि अतिरिक्त बजट खर्च होने की वजह काम में देरी हो सकती है। जितना काम देरी से होता है, उतना ही एस्टीमेट बढ़ जाता है। कई प्रोजेक्ट का बजट एस्टीमेट इसी वजह से काफी बढ़ गया है।
रेनोवेशन के लिए लगाने पड़ते हैं चक्कर
इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट की इस डिवीजन ने अपने एरिया में मकानों की रेनोवेशन पर अतिरिक्त बजट खर्च कर दिया। वहीं दूसरी ओर सैकड़ों कर्मचारी अपने मकानों की रेनोवेशन करवाने के लिए इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के चक्कर लगाते रहते हैं, लेकिन कभी बजट तो कभी दूसरी चीजों का हवाला देकर उन्हें टाल दिया जाता है। कर्मचारी संगठन भी लगातार मकानों की रेनोवेशन का मामला उठाते रहते हैं।