चंडीगढ़। शिक्षा विभाग वीरवार से घरों में चाइल्ड मैपिंग सर्वे की शुरुआत करेगा। विभाग ने बुधवार स्कूल प्रमुखों को पत्र भेजकर निर्देश जारी किए हैं कि 25 फरवरी से 12 मार्च तक शिक्षकों को घरों में 14 वर्ष की उम्र तक स्कूल नहीं जाने वाले बच्चों की कारणों के साथ सूची बनानी है। वहीं सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शहर के स्कूलों को ऐसे बच्चे चिह्नित करने के आदेश दिया गया है जिनकी वित्तीय हालत खराब है। इन विद्यार्थियों को यूटी प्रशासन हर महीने 2000 रुपए की अनुदान राशि देगा।
जिला शिक्षा अधिकारी ने पत्र में लिखा है कि शिक्षक घर घर जाकर सर्वे करेंगे। कोरोना महामारी के हालात को देखते हुए शिक्षकों से आग्रह है कि वे सरकार की ओर से जारी कोविड दिशानिर्देशों का पालन करें। बता दें कि कोरोना महामारी के कारण अप्रैल मई के माह में शहर के कई लोग पलायन कर गए थे, जिस कारण कई विद्यार्थी भी अपने पैतृक घरों को लौट गए। उनमें कई विद्यार्थी हालात सामान्य होने पर शहर तो आ गए हैं, लेकिन स्कूल नहीं पहुंचे हैं। स्कूलों से मिली जानकारी के अनुसार विद्यार्थियों ने अपने मोबाइल नंबर बदल लिए हैं। इस कारण उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है। शहर के कई मुख्य बाजारों और कॉलोनी में 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को रेहड़ी और दुकानों पर काम करते हुए देखा जा सकता है। हालांकि कई शिक्षक विद्यार्थियों के घर जाकर भी बच्चों को स्कूल भेजने के लिए अभिभावकों को प्रेरित कर रहे हैं।
कोरोना को देखते हुए सर्वे को टाला जाए
यूटी कैडर एजुकेशनल यूनियन के अध्यक्ष स्वर्ण सिंह कंबोज का कहना है कि कोरोना को देखते हुए शिक्षा विभाग को सर्वे को अभी के लिए टाल देना चाहिए, क्योंकि ऐसे घर घर जाकर सर्वे करने में शिक्षकों के कोरोना संक्रमण होने का खतरा बना रहेगा।
एससी के आदेश- वित्तीय बाधा वाले विद्यार्थियों को मिलेगा 2000 अनुदान राशि
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर समाज कल्याण विभाग के तहत यूटी चंडीगढ़ के बाल संरक्षण समाज ने सरकारी स्कूलों से विद्यार्थियों जानकारी मांगी है। स्कूलों को निर्देश दिए गए कि जिन विद्यार्थियों का अध्ययन कोविड -19 महामारी के दौरान वित्तीय बाधा के कारण प्रभावित हुआ है उनकी सूची बनाई जाए। इसके बाद स्कूल यह जानकारी बाल संरक्षण समाज के साथ साझा करेंगे। चयनित विद्यार्थियों को यूटी प्रशासन की ओर से हर महीने 2,000 रुपये की अनुदान राशि दी जाएगी।