हिंदू मैरिज एक्ट के तहत नहीं था फैसला
एडवोकेट जीएस कौशल ने अदालत में बहस के दौरान कहा कि सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक अगर विदेशी कोर्ट तलाक के केस में कोई भी फैसला हिंदू मैरिज एक्ट, 1955 के तहत नहीं सुनाएगी तो उसे भारत में माना नहीं जाएगा। इस केस में अदालत ने महज साढ़े तीन महीने की शादी में तलाक की अर्जी मंजूर कर दी जबकि हिंदू मैरिज एक्ट की धारा 14 के तहत शादी के एक साल के पहले तलाक का केस दायर नहीं किया जा सकता। सुपीरियर कोर्ट आफ कैलिफोर्निया का ये फैसला हिंदू मैरिज एक्ट के तहत नहीं था। वहीं, युवक इस केस में अदालत में पेश भी नहीं हुआ। ऐसे में चंडीगढ़ जिला अदालत ने अमेरिकी कोर्ट के फैसले को अमान्य करार दे दिया।
ये है पूरा मामला
केस के मुताबिक युवक और युवती की शादी 28 मई 2019 को यमुनानगर में हुई थी। 13 जून 2019 को यमुनानगर के रजिस्ट्रार आफ मैरिज के पास हिंदू मैरिज एक्ट के तहत उनकी शादी रजिस्टर्ड हो गई। शादी के कुछ समय बाद तक वे यमुनानगर में ही रहे। इस दौरान वे एक महीने के लिए केरल में हनीमून के लिए भी गए। कुछ दिनों बाद दोनों अमेरिका चले गए। वहां युवक ने अपना असली रंग दिखा दिया। उसने युवती को वहां अकेला छोड़ दिया। कुछ दिनों बाद युवक ने सुपीरियर कोर्ट आफ कैलिफोर्निया में तलाक का केस दायर कर दिया। 10 जुलाई 2019 को युवती को अमेरिकी कोर्ट से समन भी आ गए। युवती ने अपने वकील के जरिए उस याचिका का विरोध किया और कहा कि उनकी शादी हिंदू कानून के मुताबिक हुई है और उनके तलाक का केस अमेरिकी कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता, लेकिन अदालत ने उसकी एक न सुनी और युवक के हक में फैसला सुना दिया।
जिम्मेदारी से बचने के लिए लिया तलाक
एडवोकेट कौशल ने कहा कि युवती ने युवक के खिलाफ चंडीगढ़ में विमेन पुलिस स्टेशन में घरेलू हिंसा की शिकायत दी थी। उस शिकायत पर पुलिस ने युवक के खिलाफ आइपीसी की धार 406, 498ए के तहत एफआइआर भी दर्ज कर ली थी। युवक उस केस में भी अदालत में पेश नहीं हो रहा है। अदालत ने उसे भगोड़ा घोषित किए जाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। एडवोकेट कौशल ने कहा कि युवक ने इस केस में बचने के लिए अमेरिकी कोर्ट से तलाक ले लिया, लेकिन अब ये तलाक भारत में मान्य नहीं होगा।