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पति-पत्नी रहना चाहते हैं साथ, परिवार की छुटपुट बातों से बिगड़ रही ‘बात’, काउंसलिंग टीम लाचार

Mon, 22 Feb 2021 10:55 AM IST
निवेदिता वर्मा अमित गुप्ता, अमर उजाला, चंडीगढ़
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चंडीगढ़ सेक्टर 17 स्थित महिला पुलिस थाना। - फोटो : अमर उजाला
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चंडीगढ़ में घरेलू हिंसा के मामलों में प्रत्येक वर्ष इजाफा होता जा रहा है। महिला थाने में आने वाली इन शिकायतों में पति पत्नी के रिश्ते को मजबूत करने के लिए काउंसलिंग टीम अहम रोल निभाती है, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि टीम बिगड़ते रिश्तों के सुधार की बुनियाद नहीं रख पा रही। चार साल पहले सोशल वेलफेयर की काउंसलिंग टीम ने इसका जिम्मा संभाला था, लेकिन अब पुलिस की अपनी ही टीम इनकी काउंसलिंग कर रही है। 
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महिला थाने में रोजाना औसतन आठ से दस मामले आ रहे हैं। इन मामलों में काउंसलिंग के दौरान यह बात भी सामने आई कि अधिकतर शिकायत में पति-पत्नी साथ रहना चाहते हैं, लेकिन परिवार के सदस्य छुटपुट बातों को लेकर एक-दूसरे पर आरोप लगाते रहते हैं। इससे पति-पत्नी के रिश्तों में दरार आ रही है। इसके अलावा रिश्तेदार की दखल की वजह से भी दंपती परेशान हैं। इन्हीं बातों को लेकर वे थाने पहुंच जाते हैं। 

क्या कहते हैं आंकड़े 
आंकड़ों के अनुसार 2019 में टीम ने 45 फीसदी पति-पत्नी व परिवारों को जोड़ा। 2020 में यह आंकड़ा घटकर 30 फीसदी रह गया। महिला थाने में 2019 में शहर के अलग-अलग हिस्सों से 2524 शिकायतें दर्ज हुईं। इनमें पुलिस की काउंसलिंग टीम ने 1144 पति-पत्नी और उनके परिवार के बीच अनबनों को दूर कर उनका आपस में समझौता करवाया। साथ ही 178 मामलों में एफआईआर दर्ज की गई जबकि 2020 में लॉकडाउन के दौरान मामलों में बढ़ोतरी हुई और आंकड़ा बढ़कर 2784 पहुंच गया। टीम इनमें से सिर्फ 819 मामलों का निवारण कर सकी जबकि 96 मामलों में एफआईआर हुई है। 

जनवरी 2021 में 330 शिकायतें मिल चुकी हैं। चंडीगढ़ सेकंड इनिंग के प्रधान व सामाजिक कार्यकर्ता आरके गर्ग कहना है कि महिला थाने में पुलिसकर्मी काउंसलर के अलावा सोशल वेलफेयर काउंसलिंग की अलग से टीम रखनी चाहिए, ताकि महिला थाने में आने वाले मामले को बेहतर तरीके से सुलझाया जा सके। 

थानों में नहीं हैं काउंसलिंग का अलग कमरा 
थानों में आने वाली शिकायतों की काउंसलिंग करने के लिए 13 टीमें गठित की गई हैं। इनमें 31 पुरुष पुलिस और 17 महिला पुलिसकर्मियों को शामिल किया गया है। एक टीम में करीब पांच पुलिस में एक से दो महिला पुलिसकर्मी शामिल होते हैं। हैरानी की बात है कि महिला थाने में कोई अलग से काउंसलिंग का कमरा नहीं बनाया गया है। केस के आने पर पुलिस के केबिन में ही इनकी काउंसलिंग की जाती है जबकि अन्य मामलों में कई थाने के बाहर ही बैठे होते हैं। 
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ऐसी होती हैं अधिकतर शिकायतें
  1. शादी के बाद भी गाड़ी तो कभी पैसों की होती है मांग
  2. दहेज के लिए अक्सर पति और सास के ताने
  3. दहेज के खातिर छोटी छोटी बातों पर प्रताड़ित किया जाना
  4. माता-पिता को दहेज देने के लिए ताने मारना
  5. नौकरी पेशा होने से परेशानी 
  6. खाना अच्छा नहीं बना तो दहेज का ताना देकर मारपीट 
  7. शराब पीकर मारपीट करना, माता-पिता को गाली देना
  8. दहेज नहीं दिया तो घर से भगा देने की धमकी 
साल             शिकायत       समझौता    एफआईआर
2019                2524          1144           178
2020                2784            819            96
2021                 330             105            18

कुछ साल पहले सोशल वेलफेयर की काउंसलिंग टीम होती थी, लेकिन बाद में पुलिस अपने स्तर पर ही महिला पुलिसकर्मियों को शामिल कर काउंसलिंग करती है। लगातर यह टीम काम कर केसों के निवारण में जुटी रहती है। - चरणजीत सिंह विर्क, डीएसपी महिला थाना 

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