भाजपा पार्षद ने पूछा था सवाल
भाजपा के पार्षद महेशइंदर सिंह सिद्धू ने नगर निगम से लिखित में इस संबंध में कई सवाल पूछे थे और निगम के बजट को लेकर जवाब मांगा था। उन्होंने छह सवाल पूछे थे। निगम के जवाब से स्पष्ट हो गया कि निगम की स्थिति वाकई बेहद खराब है। सिद्धू ने इसको लेकर सदन में भी सवाल उठाया और कहा कि इस पर सभी ध्यान देने की जरूरत है, क्योंकि ऐसा ही चलता रहा तो निगम के पास कर्मचारियों को वेतन देने के लिए पैसे भी नहीं होंगे।
120 करोड़ का डेफिसेट कैसे होगा पूरा
बैठक में पूछा गया कि निगम की हर महीने कमिटिड लायबिलिटी (प्रतिबद्ध देनदारियां) कितनी है। संयुक्त आयुक्त गुरिंदर सोढ़ी ने जवाब दिया कि करीब 70 करोड़ रुपये। जोड़ा गया तो निगम को छह महीने में 420 करोड़ रुपये की जरूरत होगी। ये भी सिर्फ वेतन व जरूरी खर्चे हैं। वार्डों के विकास कार्यों पर खर्च को जोड़ा भी नहीं गया है। वहीं, निगम की कमाई और प्रशासन से मिलने वाला ग्रांट-इन-एड जोड़कर भी अनुमानित करीब 300 करोड़ हो रहा है। ऐसे में सभी चिंतित हैं कि 120 करोड़ का डेफिसिट कैसे पूरा होगा। ऐसे में अब पार्षदों और अधिकारियों की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि निगम अब कर्मचारियों को वेतन देने के लिए ही संघर्ष करेगा। विकास कार्य पर खर्च तो दूर हैं। सदन की बैठक में वित्तीय संकट पर चर्चा के दौरान आयुक्त विनय प्रताप सिंह ने भी कि उनका मानना है कि निगम में फंड अर्जित हो सकते हैं। उसपर ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि पार्षदों को साथ की भी जरूरत हैं।