चंडीगढ़। जन टीकाकरण अभियान में शहर के 14 सरकारी और 11 निजी अस्पतालों में टीके लगाने के लिए केंद्र बनाया गया है। अभियान के तीसरे चरण में निजी अस्पतालों में टीका लगवाने की सुविधा मिलने पर शहर के लोग सरकारी अस्पताल जाना ज्यादा पसंद नहीं कर रहे हैं। इसके लिए निजी अस्पताल की व्यवस्था और सुविधाएं मुख्य कारण बनकर सामने आ रही हैं। वहीं, दूसरी तरफ सरकारी अस्पतालों में बनाए गए केंद्रों को भी लाभार्थियों की सुविधा के अनुकूल बनाने का लगातार प्रयास किया जा रहा है, लेकिन तकनीकी रुकावट के कारण सरकारी केंद्रों पर शत-प्रतिशत सुविधा मुहैया नहीं हो पा रही है। नतीजा लाभार्थी सरकारी के बजाय निजी अस्पतालों में शुल्क अदा कर टीका लगवाना ज्यादा पसंद कर रहे हैं।
सरकारी निशुल्क, निजी अस्पतालों में चुकाना पड़ रहा शुल्क
सरकार ने जन टीकाकरण को सरकारी अस्पताल में निशुल्क लगाने की व्यवस्था की है, जबकि निजी अस्पतालों में टीका लगवाने वाले लाभार्थियों को उसके लिए 250 रुपये शुल्क देने पड़ रहे हैं। ऐसी स्थिति में लोग सरकारी अस्पताल की भीड़ से बचने के लिए निजी अस्पतालों में जाना पसंद कर रहे हैं। वहीं, लोगों का यह भी कहना है कि संक्रमण की बढ़ती दर के कारण अभी भीड़ वाली जगह पर जाना खतरनाक साबित हो सकता है, चाहे वह सरकारी अस्पताल ही क्यों न हो।
निजी अस्पतालों में धक्का-मुक्की न घंटों का इंतजार
सरकारी अस्पतालों में सर्वर की धीमी रफ्तार के कारण लाभार्थियों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। वहीं, पंजीकरण के लिए कुछ सरकारी केंद्रों पर धक्का-मुक्की से भी गुजरना पड़ रहा है, जबकि दूसरी तरफ निजी अस्पतालों में ऐसी कोई अव्यवस्था सामने नहीं आ रही है। हालांकि, स्वास्थ्य निदेशक डॉ. अमनदीप कंग का कहना है कि सर्वर की रुकावट के कारण लाभार्थियों को परेशानी हो रही है, जो कुछ दिनों में पूरी तरह दूर हो जाएगी।
निजी अस्पताल में दिनों दिन बढ़ रही रफ्तार
दिन सरकारी निजी कुल लाभार्थी
वीरवार 732 911 1643
बुधवार 651 767 1418
मंगलवार 550 569 1119
सोमवार 300 256 556