कोरोना के बढ़ते केसों ने चंडीगढ़ की चिंता बढ़ा दी है। चंडीगढ़ का पॉजिटिविटी रेट राष्ट्रीय औसत से काफी आगे निकल गया है। सिटी का पॉजिटिविटी रेट 13.68 फीसदी दर्ज किया गया है, जबकि राष्ट्रीय पॉजिटिविटी रेट करीब 7.87 फीसदी है। प्रति 100 टेस्ट पर आने वाले कंफर्म केस को पॉजिटिविटी रेट कहते हैं।
चंडीगढ़ में प्रति 100 टेस्ट पर 13 कंफर्म केस आ रहे हैं, जबकि देश में प्रति 100 पर आठ केस। खास बात यह है कि देश का पॉजिटिविटी रेट कम हो रहा है, जबकि चंडीगढ़ का बढ़ रहा है। 15 से 28 जुलाई के बीच देश का पॉजिटिविटी रेट करीब 11.23 फीसदी दर्ज किया गया था, जबकि 14 से 27 अगस्त के बीच यह 7.87 फीसदी दर्ज किया गया है। चंडीगढ़ में एक अगस्त को पॉजिटिविटी रेट सात फीसदी रिकार्ड किया गया था, जो 29 अगस्त को 13.68 फीसदी रिकॉर्ड हुआ है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस बारे में एक गाइडलाइंस भी जारी की है। इसके तहत किसी शहर की स्थिति तभी नियंत्रण में मानी जाएगी, जब उस शहर का पॉजिटिविटी रेट 14 दिन तक पांच फीसदी से कम रहे। यानी कि 100 में से जब पांच कंफर्म केस मिलें, तब माना जा सकता है कि शहर की स्थिति नियंत्रण में है।
पीजीआई के एक विशेषज्ञ ने बताया कि इसका मतलब साफ है कि शहर में टेस्ट अभी काफी कम हो रहे हैं। पॉजिटिविटी रेट जितना ज्यादा होगा, वहां माना जाता है कि सिर्फ बीमार का टेस्ट किया जा रहा है, बड़ी संक्रमित आबादी का टेस्ट नहीं हो रहा। जब तक उनका टेस्ट किया जाता है, तब तक वे काफी लोगों को बीमार कर चुके होते हैं। ऐसे में चंडीगढ़ प्रशासन को कोरोना टेस्ट बढ़ाने की जरूरत है।
कुछ दिन पहले डब्ल्यूएचओ ने कहा था कि विश्व के कुछ हिस्सों में कोरोना के साथ इबोला फैला हुआ था लेकिन प्रभावित देशों की सरकारों ने इबोला को कंट्रोल करने के लिए बड़ी तेजी से टेस्ट के साथ कांटैक्ट ट्रेसिंग की, जिससे संक्रमण पर काबू पाया गया। इबोला और कोरोना की स्थिति एक जैसी है। ऐसे में इसे रोकने के लिए तेजी से टेस्ट के साथ कांटैक्ट ट्रेसिंग बढ़ानी होगी।
अब प्रशासन को कड़े कदम उठाने होंगे। एक-दो दिन के लॉकडाउन से कुछ नहीं होना है। संक्रमण की चेन को रोकने के लिए कम से कम 14 दिन का लॉकडाउन जरूरी है। साथ ही टेस्ट ज्यादा से ज्यादा बढ़ाने होंगे। प्राइवेट लैब की संख्या में भी इजाफा करना होगा। - डॉ. संजीव भाटिया, डायरेक्टर ग्लोबल हेल्थ केयर।