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राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक महत्वपूर्ण फैसले में द न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी को सेवा में कमी का दोषी करार दिया है। आयोग ने कहा है कि कैशलेस मेडिक्लेम पॉलिसी के अंतर्गत इंश्योरेंस कंपनी दस्तावेजों के अभाव में क्लेम में कटौती नहीं कर सकती।
शिकायतकर्ता सिमरित कौर निवासी सेक्टर-34 ने जिला उपभोक्ता विवाद निवारण फोरम के फैसले के खिलाफ राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में अपील की थीं। इस पर सुनवाई करते हुए उपभोक्ता आयोग निर्देश दिया कि बीमा कंपनी शिकायतकर्ता को 81 हजार एक सौ 38 रुपये 12 प्रतिशत वार्षिक दर ब्याज के साथ दे। साथ ही सेवा में कोताही के लिए 10 हजार मुआवजा और साढ़े सात हजार रुपये मुकदमा खर्च अदा करे।
सिमरीत कौर के वकील पंकज चांदगोठिया ने कहा कि शिकायतकर्ता (अब अपीलकर्ता) दस वर्षों से मेडिक्लेम पॉलिसी लेती आ रही हैं। पहली बार क्लेम के लिए उन्होंने आवेदन किया। उन्होंने बताया कि बीमार होने पर इलाज के दौरान एक लाख 10 हजार रुपये खर्च हुए, लेकिन बीमा कंपनी ने मात्र 30 हजार रुपये का भुगतान किया। बाकी राशि शिकायतकर्ता को अदा करना पड़ा।
उपभोक्ता फोरम ने निर्देश में कहा था कि बीमा कंपनी शिकायतकर्ता को 30 हजार रुपये अदा करे, साथ ही 10 हजार मुआवजा और साढ़े सात हजार रुपये मुकदमा खर्च अदा करे। इसी फैसले के खिलाफ शिकायतकर्ता ने उपभोक्ता आयोग में अपील की थी।