चंडीगढ़ को एक से डेढ़ लाख लोगों के रहने के लिए बसाया गया था, लेकिन अब सिटी की आबादी 12 लाख तक पहुंच चुकी है। जनसंख्या बढ़ने के साथ ही शहर की सड़कों पर वाहनों का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। इतना ही नहीं पड़ोसी राज्यों से रोजाना करीब डेढ़ लाख अधिक छोटे व बड़े वाहन सिटी में प्रवेश कर इस दबाव को और बढ़ा रहे हैं।
नतीजतन शहर और बाहरी वाहनों के बढ़ते दबाव के चलते शहर की सड़कें कराह उठी हैं। ट्रिब्यून चौक, हल्लोमाजरा चौक समेत शहर के कई अन्य चौक-चौराहे जाम की गिरफ्त में रहते हैं। ऐसे में वाहन चालकों को खासी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। खासकर सुबह और शाम को वाहन चालकों को जाम का झाम झेलना पड़ता है। यही वजह है कि बीते दो सालों से चंडीगढ़ में रिंग रोड बनाने की मांग चल रही है। बीते मंगलवार को संसद में भी सांसद किरण खेर ने ट्राइसिटी में बेतहाशा बढ़ रहे ट्रैफिक की समस्या का हवाला देकर रिंग रोड बनाने की आवाज बुलंद की।
अगर बात 60 से 70 के दशक की करें तो चंडीगढ़ में ज्यादातर लोग आवागमन के लिए साइकिल का प्रयोग करते थे। इसके अलावा एक-दो लोगों के पास स्कूटर देखने को मिल जाते थे। जानकारों की मानें तो 80 के दशक में अचानक चार पहिया वाहनों का चलन बढ़ा और शहर में वाहनों की संख्या में इजाफा होने लगा। 80 के दशक में बाहर से सिटी में एक से डेढ़ हजार वाहनों का प्रवेश होता था। यह आंकड़ा अब रोजाना डेढ़ लाख से अधिक का हो गया है। निरंतर बढ़ते ट्रैफिक के दबाव से शहरवासी जहां रोज जाम से जूझ रहे हैं, वहीं सड़कें भी कराह उठी हैं। अब इस समस्या से निजात दिलाने के लिए शहरवासियों को रिंग रोड की जरूरत है।
तीनों प्रदेशों के बीच बनी सहमति
चंडीगढ़ प्रशासक के एडवाइजर मनोज परिदा ने सांसद की आवाज को मजबूती देते हुए कहा है कि चंडीगढ़ प्रशासन, संसद सत्र खत्म होते ही पंजाब और हरियाणा के साथ मिलकर मंत्रालय में एक महत्वपूर्ण मीटिंग करने जा रहा है। एडवाइजर का कहना है कि इस मीटिंग के बाद रिंग रोड के प्रारूप और बजट को अंतिम रूप दिए जाने की पूरी संभावना है। उनका कहना है कि ट्राइसिटी में बढ़ती ट्रैफिक समस्या से निपटने के लिए चंडीगढ़ से लगते हरियाणा और पंजाब के एरिया में रिंग रोड बनाने पर तीनों प्रदेशों के बीच सहमति बन गई है।
प्रशासक भी कर चुके हैं मीटिंग
एडवाइजर की मानें तो तीनों प्रदेशों से सैद्धांतिक मंजूरी के बाद अब तीनों अपने स्तर पर इस मुद्दे को नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) के सामने उठाएंगे। एनएचएआई ही इस रोड का निर्माण करेगी। इस रिंग रोड का निर्माण पंजाब और हरियाणा के हिस्से में ही होना है। इस लिए इसे आउटर रिंग रोड कहा जा रहा है। चंडीगढ़ में लगातार बढ़ रहे ट्रैफिक के कारण रिंग रोड की लंबे समय से जरूरत महसूस की जा रही थी। रिंग रोड़ का यह मुद्दा ट्राइसिटी के लिए इतना महत्वपूर्ण है कि प्रशासक वीपी सिंह बदनौर ने पिछले दिनों अधिकारियों की मीटिंग बुलाकर प्रोजेक्ट की रूपरेखा की जानकारी ली थी।
रिंग रोड बनने पर ऐसे दौड़ेंगे वाहन
- खरड़ से आने वाले वाहन चंडीगढ़ नहीं आएंगे। ये वाहन खरड़ से सीधे मोहाली और फिर पंजाब के दूसरे शहरों में जा सकेंगे।
- इसी तरह जालंधर की ओर से आने वाला ट्रैफिक मुल्लांपुर-बद्दी-नालागढ़ होकर हिमाचल की ओर निकल जाएगा।
- बता दें कि अभी पंजाब और हरियाणा की ओर से आने वाला ट्रैफिक विभिन्न रास्तों से होकर चंडीगढ़ आता है।
- अभी चंडीगढ़ आने के लिए मोहाली की ओर से ही कई एंट्रेंस हैं। वहीं हरियाणा की तरफ से भी दक्षिण मार्ग और मध्य मार्ग मुख्य एंट्रेंस हैं जिनसे रोजाना हजारों वाहन शहर में दाखिल होते हैं। रिंग रोड बनने के बाद यह दबाव सिटी में कम हो जाएगा।