अर्द्धसैनिक बल में एएसआई पद के लिए लिखित परीक्षा में गड़बड़ी करने के मामले में 10 साल बाद शुक्रवार को अदालत ने दोषियों को सजा सुनाई। स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (एसएससी) के पूर्व क्षेत्रीय उप निदेशक नवीन सहगल और पूर्व ऑडिटर सतीश अहलावत को सीबीआई के जज सुशील कुमार गर्ग की अदालत ने तीन-तीन साल की सजा सुनाई और क्रमश: साढ़े चार लाख और दो लाख रुपये जुर्माना भी लगाया।
बता दें कि बीते मंगलवार को दोनों पक्षों ने अपनी अंतिम दलीलें पेश की थीं। इसके बाद बुधवार को इन्हें दोषी करार दिया गया था। वहीं, 10 आरोपियों को सुबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया था। इससे पहले 7 मार्च 2014 को नवीन सहगल समेत 12 लोगों पर आरोप तय किए गए थे। हालांकि 14 लोगों पर मामला दर्ज किया गया था। इनमें से सौरभ कांत और राजपाल सरकारी गवाह बनने के लिए राजी हो गए थे।
अदालत ने दुष्यंत कुमार, प्रीतम सिंह, दीपक दहिया, राकेश शर्मा, दिनेश कुमार, सुबोध गौड़, दीपक संधू, हरगोबिंद, चित्रा वसु और संदीप को भी आरोपी बनाया था। सभी पर लिखित परीक्षा में जालसाजी, धोखाधड़ी व अनियमितता बरतने का आरोप था। हालांकि अदालत ने सबको बरी कर दिया है।
यह है मामला
सीबीआई को 2011 में शिकायत मिली थी कि अर्धसैनिक बल में एएसआई पद के लिए हुई लिखित परीक्षा में गड़बड़ी हुई है। जांच में पता चला था कि अंबाला स्थित परीक्षा केंद्र के एक ही कमरे में बैठे नौ आवेदक अव्वल आए थे। सीबीआई ने अव्वल आने वाले उम्मीदवारों के भिवानी स्थित घर में छापे मारे तो संदिग्ध कागजात मिले थे। सीबीआई को पता चला था कि एसएससी के कई कर्मचारी गड़बड़ी में शामिल थे। वहीं, परीक्षा में उत्तीर्ण न होने वाले दो उम्मीदवारों ने भी सीबीआई में शिकायत की थी। इसके बाद मामला दर्ज किया गया था।