चंडीगढ़ की बुड़ैल जेल में सजायाफ्ता कैदी मंजीत ने अपनी किताब के लिए ‘तिनका-तिनका इंडिया अवार्ड’ जीता है। नेशनल ह्यूमन राइट्स डे (10 दिसंबर) की पूर्व संध्या पर की घोषणा की गई है। अवार्ड के लिए देशभर की जेलों में सजायाफ्ता कैदियों से उनकी कविताओं, काव्य और पेंटिंग्स के लिए एंट्री मंगाई गई थी।
बुड़ैल जेल में सजा काट रहे पटियाला निवासी मंजीत सिंह को उनकी किताब के लिए इस अवार्ड से सम्मानित किया गया है। तिनका-तिनका अवार्ड की शुरुआत कैदियों के सुधार के लिए काम कर रही सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. वर्तिका नंदा ने इसी साल से की है।
इसका उद्देश्य सजा काट रहे कैदियों को क्रिएटिव राइटिंग और अपने मानवाधिकार अधिकारों को उठाना है। इस अवार्ड के लिए देशभर की जेल में मौजूद कैदियों से एंट्री मंगवाई गई थी। इनमें बुड़ैल जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे मंजीत सिंह को उनकी किताब ‘मेरी आत्मा जागृति की कहानी’ के लिए अवार्ड दिया गया है।
मंजीत ने सजा के दौरान ही पढ़ाई की और बीए व एमए की डिग्री हासिल की। यह किताब उन्होंने जेल में सजा के दौरान अपनी जिंदगी में आए बदलाव के बारे में लिखी है।