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चंडीगढ़ बर्ड्स क्लब की ओर से आयोजित हुई बर्ड रेस, फॉल्कन टीम रही विजेता

Tue, 14 Mar 2017 09:29 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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चंडीगढ़ बर्ड्स क्लब की ओर से आयोजित हुई बर्ड रेस - फोटो : अमर उजाला
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बर्ड वॉचरों के बीच रविवार को अनोखी बर्ड रेस का आयोजन किया गया। चंडीगढ़ बर्ड्स क्लब की ओर से आयोजित रेस में 15 टीमों ने हिस्सा लिया। हर टीम में तीन से चार सदस्य थे। इन टीमों को चंडीगढ़ व आसपास के 50 किलोमीटर एरिया में अलग-अलग प्रजातियों के पक्षियों को ढूंढ़ना था। 
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 इसमें ट्राइसिटी के करीब 150 बर्ड वॉचर शामिल हुए। शाम को सेक्टर आठ में आयोजित एक कार्यक्रम में विजेताओं को सम्मानित किया गया।  बर्ड रेस में फॉल्कन टीम विजयी रही। इस टीम ने एक दिन में 163 पक्षियों की अलग-अलग प्रजातियां देखीं। यह टीम सुबह पांच बजे ही स्पॉट पर पहुंच गई थी। टीम की मुख्य सदस्य गीता गोस्वामी ने बताया कि उनकी रणनीति थी कि हिल एरिया में सुबह पहुंचा जाए ताकि ज्यादा से ज्यादा पक्षियों को देखा जा सके। बाद में मैदानी इलाकों को चुना गया। टीम के सदस्यों ने कसौली, चक्कीमोड़, जंगेशू वाया चंडीमंदिर, बुर्जकोटिया, सुखना, घग्गर, मोटेमाजरा में जाकर पक्षियों को ढूंढा और उनकी फोटो भी खींची। इस टीम में राकेश अहलावत, नितिन, रिक टूर, दिव्या गोस्वामी दीक्षित शामिल थे। इस दौरान टीम ने विलुप्त हो रही प्रजाति हिमालयन बजर्ड की फोटो भी उतारी। दूसरे नंबर टीम केसट्रेल रही। इस टीम ने 162 प्रजाति देखी। तीसरे नंबर पर टीम गोसवेक रही।

बच्चों की बुलबुल टीम ने भी किया धमाल
तीन बच्चे और महिला बर्ड वार्चर रीमा ढिल्लन की टीम बुलबुल ने भी धमाल मचाया। इस टीम ने करीब 100 पक्षियों को देखा। चिराग, सीरत और सुखमणि ने बताया कि उन्हें इस रेस में हिस्सा लेने में काफी मजा आया। इससे पक्षियों केबारे में जानकारी तो बढ़ी ही, साथ ही घूमने का भी खूब लुत्फ उठाया। यह टीम मोरनी, पंचकूला गारबेज प्लांट, सुखना लेक सकेतड़ी घूमी। रीमा ढिल्लन के मुताबिक इनको पैरेंट्स ने ही इन्हें भेजा ताकि बच्चे पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनें।
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जाल में फंसे पक्षी को बचाया

चंडीगढ़ बर्ड्स क्लब की ओर से आयोजित हुई बर्ड रेस - फोटो : अमर उजाला
बर्ड आफ दी डे रहा सिनीरस वल्चर
बर्ड रेस की दौरान बर्ड आफ दा डे सिनीरस वल्चर रहा। बर्ड विशेषज्ञ प्रोफेसर एमएस सेखों ने बताया कि गिद्धों की यह प्रजाति विलुत्प होने की कगार पर है। चंडीगढ़ के आसपास यह पक्षी बहुत दिनों बाद देखा गया है। 30 अलग-अलग झुंड में गिद्ध बैठे हुए थे। उनमें सिर्फ एक सिनीरस वल्चर था।

जाल में फंसे पक्षी को बचाया
बर्ड वांचिंग के दौरान मनमोहन सिंह, हरमनजीत सिंह व मनवीर सिंह ने बताया कि जब वे सुखना लेक के रेग्यूलेटरी एंड पर बर्ड वांचिंग कर रहे थे, तभी उन्होंने टफटेड डक को मछली पकड़ने वाले जाल में फंसा पाया। पंख फंसे होने के कारण वह तड़प रहा था। एक साथी कार से चाकू लेकर आया और जाल को काटा। उसके बाद पक्षी को निकाला। उनके मुताबिक सुखना लेक के एक कर्मचारी ने ही जाल डाला है। वह अपने खाने के लिए मछलियां पकड़ता है।
 
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