चंडीगढ़ में जनगणना 2027 की तैयारियां शुरू हो गई हैं। प्रशासन ने 10 से 30 नवंबर 2025 तक पहले चरण के प्री-टेस्ट कराने का फैसला लिया है। इस दौरान नागरिकों को स्वयं गणना यानी सेल्फ एन्यूमरेशन का विकल्प भी मिलेगा जो 1 से 7 नवंबर तक उपलब्ध रहेगा।
प्रशासन ने इसके लिए अधिकारियों की नियुक्ति भी कर दी है जिसमें डिप्टी कमिश्नर को प्रिंसिपल सेंसस ऑफिसर बनाया गया है। यूटी प्रशासन के एक अधिकारी ने बताया कि प्री-टेस्ट का मकसद डाटा कलेक्ट करने के तरीकों, लॉजिस्टिक्स, ट्रेनिंग और डिजिटल टूल्स की जांच करना है। यह 2027 की जनगणना से पहले फील्ड की चुनौतियों का आकलन करने के लिए की जा रही है। इसमें मोबाइल एप से डाटा कलेक्शन और सेल्फ एन्यूमरेशन का टेस्ट किया जाएगा। इसके लिए अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय कर दी गई है। डिप्टी कमिश्नर को प्रिंसिपल सेंसस ऑफिसर, एडिशनल डिप्टी कमिश्नर को डिस्ट्रिक्ट सेंसस ऑफिसर और सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (सेंट्रल) को चार्ज ऑफिसर नियुक्त किया गया है। प्रशासन ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है।
देश में 2011 में हुई थी पिछली जनगणना
देश में पिछली जनगणना 2011 में हुई थी। इसे हर 10 साल में किया जाता है। इस हिसाब से 2021 में अगली जनगणना होनी थी लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण इसे टाल दिया गया था। 2011 तक जनगणना फॉर्म में कुल 29 कॉलम होते थे। इनमें नाम, पता, व्यवसाय, शिक्षा, रोजगार और माइग्रेशन जैसे सवालों के साथ केवल एससी और एसटी कैटेगरी से ताल्लुक रखने को रिकॉर्ड किया जाता था।
स्वयं गणना के विकल्प की होगी टेस्टिंग
जनगणना में एक प्रावधान यह भी होगा कि लोग अपने घर से ही ऑनलाइन माध्यम से जनगणना पोर्टल पर अपनी जानकारी दे सकेंगे। इस संबंध में जल्दी ही एक पोर्टल लॉन्च किया जाएगा। इसपर लोग अपना रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे। फिर अपने और परिवार के बारे में पूरी जानकारी दे सकेंगे। यहीं पर लोग जनगणना में शामिल सभी सवालों के जवाब भरकर सबमिट कर देंगे तो यह जानकारी दर्ज हो जाएगी। फिलहाल इसकी टेस्टिंग होगी।
जनगणना में सहयोग नहीं दिया तो होगी कार्रवाई
अधिसूचना में कहा गया है कि जनगणना कार्य से जुड़ी किसी भी जिम्मेदारी का पालन न करने या उसमें बाधा डालने पर सेंसस एक्ट 1948 की धारा 11 के तहत कार्रवाई की जा सकती है। इसके तहत दोषी पाए जाने पर एक हजार रुपये तक जुर्माना या तीन साल तक का कारावास या दोनों हो सकते हैं।