पहली अप्रैल से शहर में 15 साल पुराने कामर्शियल डीजल वाहन नहीं चलेंगे। खुद प्रशासन के 600 वाहन बंद हो रहे हैं। इनमें सीटीयू की बसें और कई विभागों की सरकारी गाड़ियां भी शामिल हैं। स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (एसटीए) सभी विभागों को अपने पुराने वाहन बदलने का पहले ही नोटिस जारी कर चुकी है। 31 दिसंबर 2016 से ही यह वाहन बंद किए जाने थे। लेकिन विभिन्न ट्रांसपोर्ट संगठनों के दबाव में प्रशासन ने यह फैसला 31 मार्च तक टाल दिया था। 31 मार्च करीब आने पर अब एसटीए ने इन वाहनों पर रोक लगाने की तैयारी कर ली है। 31 मार्च के बाद इन वाहनों को चालान कर जब्त करने की तैयारी है।
अभी चंडीगढ़ के ही 2 हजार से अधिक ऐसे वाहन सड़कों पर दौड़ रहे हैं। दूसरे प्रदेशों से आने वाले वाहनों की संख्या इससे अलग है। 31 मार्च के बाद चंडीगढ़ ही नहीं दूसरे राज्यों के वाहनों पर भी पाबंदी होगी। अभी पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के सैकड़ों ऐसे वाहन रोजाना शहर में घूमते हैं। ऐसे में अब इन वाहनों पर पूर्ण तौर पर रोक लग जाएगी।
डीजल वाहन पेट्रोल की क्षमता में ज्यादा प्रदूषण उत्पन्न करते हैं। खासकर तब जब यह वाहन पुराने हो जाते हैं। 15 साल पुराने वाहन तो कई गुणा प्रदूषण उत्पन्न करते हैं। जिससे शहर की फिजा में जहर घुलना शुरू हो जाता है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) इन वाहनों पर रोक लगाने के आदेश पहले ही जारी कर चुका है। इन्हीं आदेशों को ध्यान में रखते हुए चंडीगढ़ प्रशासन भी अब इन वाहनों पर रोक लगा रहा है।