सेना को यह अधिकार नहीं है कि वह किसी के विवाह को अमान्य करार दे सके। आर्म्ड फोर्स ट्रिब्यूनल (एएफटी) चंडीगढ़ ने विवाह को अमान्य करार देकर सैनिक की दूसरी पत्नी को फैमिली पेंशन से इन्कार करने के आदेश को रद्द करते हुए तीन माह में पेंशन जारी करने का ओदश दिया है।
हिंदू मैरिज एक्ट के तहत किसी व्यक्ति के विवाह को अमान्य करार देने के लिए सक्षम अदालत का आदेश अनिवार्य है। सेना को यह अधिकार नहीं है कि वह किसी के विवाह को अमान्य करार दे सके। आर्म्ड फोर्स ट्रिब्यूनल (एएफटी) चंडीगढ़ ने विवाह को अमान्य करार देकर सैनिक की दूसरी पत्नी को फैमिली पेंशन से इन्कार करने के आदेश को रद्द करते हुए तीन माह में पेंशन जारी करने का ओदश दिया है।
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याचिका दाखिल करते हुए कांगड़ा निवासी चंचला देवी ने बताया कि उसके पति गोरखू राम भारतीय सेना में थे। उनका पहला विवाह बिमला देवी के साथ 1966 में हुआ था, लेकिन वह दूसरे व्यक्ति के साथ रहने लगी। गोरखू ने याची से 1970 में विवाह कर लिया। 2010 में गोरखू राम की मौत हो गई और याची ने फैमिली पेंशन के लिए आवेदन किया। सेना ने आवेदन रद्द करते हुए कहा कि गोरखू राम ने पहली पत्नी से बगैर तलाक लिए उसके जीवित रहते चंचला देवी से विवाह किया था ऐसे में उनका विवाह वैध नहीं है।