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Air Pollution: चंडीगढ़ की हवा में घुल रहा ‘जहर’... सांसों पर असर, हर सेक्टर में AQI 200 पहुंचा

Wed, 23 Oct 2024 12:59 PM IST
अंकेश ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

चंडीगढ़ में भी हवा खराब होने लगी है। बीते कुछ दिनों से वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) पहले 100 से 150 के बीच दर्ज किया जा रहा था लेकिन अब अधिकतर सेक्टरों में 200 के करीब पहुंच गया है।
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चंडीगढ़ की हवा भी होने लगी खराब। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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वायु प्रदूषण की चपेट में पंजाब, हरियाणा और दिल्ली ही नहीं बल्कि अब सिटी ब्यूटीफुल चंडीगढ़ भी आ गया है। पिछले कुछ दिनों से शहर की हवा लगातार प्रदूषित हो रही है। वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) पहले 100 से 150 के बीच दर्ज किया जा रहा था लेकिन अब अधिकतर सेक्टरों में 200 के करीब पहुंच गया है। सेक्टर-53 में यह 200 के पार पहुंच चुका है, जिससे शहर की हवा खराब श्रेणी में दर्ज की जा रही है। यह स्थिति विशेष रूप से बुजुर्गों, बच्चों और सांस की बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए स्वास्थ्य
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संबंधी जोखिम पैदा कर सकती है। 

वायु प्रदूषण बढ़ने से खासकर अस्थमा के मरीजों की परेशानी बढ़ने लगी गई है। सुबह-शाम हल्की ठंड और वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ने से अस्थमा के अटैक के मामले बढ़ गए हैं। ओपीडी में ऐसे मरीजों की संख्या भी बढ़ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्थिति की गंभीरता को समझते हुए दिवाली से पहले से एहतियात जरूरी है ताकि ऐसे लोग त्योहार पर सुरक्षित रहते हुए परिवार के साथ खुशियां मना पाएं। 

पीजीआई के सामुदायिक चिकित्सा विभाग के प्रो. रविंद्र खैवाल क्या कहना है कि अक्सर सर्दियों में सांस के मरीज की दिक्कत बढ़ जाती है। गंभीर स्थिति की वजह से मरीजों को अस्थमा के अटैक आने लगते हैं। अटैक की कई वजहें हो सकती हैं। इसमें ठंड के साथ वायु प्रदूषण अहम है। प्रो. रविंद्र ने बताया कि अस्थमा एक सांस संबंधी रोग है जिसमें श्वसन नलियों में सूजन आ जाती है। वायु प्रदूषण,
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खासकर स्मोकिंग और पटाखों का धुआं अस्थमा के मरीजों के लिए बेहद खतरनाक है।

प्रो. रविंद्र का कहना है कि हवा की गुणवत्ता खराब होने पर सांस लेना मुश्किल हो जाता है और अस्थमा के लक्षण बढ़ जाते हैं इसलिए इस दौरान अस्थमा के मरीजों को सावधान रहना जरूरी है क्योंकि उनकी थोड़ी सी सतर्कता उन्हें बड़ी समस्याओं से बचा सकती है। प्रो. रविंद्र ने बताया कि पटाखे जलाने से सल्फर आक्साइड, नाइट्रोजन आक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी जहरीली गैसें वातावरण में फैलती हैं। इसके अलावा वातावरण में पीएम-10 और पीएम-2.5 का स्तर बढ़ जाता है, जो स्वास्थ्य को प्रभावित करता है।
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