इन पब्लिक टायलेट्स की हालत 4 साल से खस्ता है। लोगों के लिए इनका प्रयोग करना मुश्किल हो गया है। सूत्रों का कहना है कि सदन में रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल का टेंडर खारिज करने के बावजूद चंद पार्षद सलाहकार परिमल राय को मिले। परिमल राय ने भी समझा कि अगर पीपीपी मॉड न देकर नगर निगम खुद टायलेट्स के रनोवेशन और रखरखाव करता है तो काफी खर्चा होगा। सलाहकार ने प्रशासक से बात की जिसके बाद प्रशासक ने यह निर्देश दिए हैं।
गुटबाजी से नहीं हो पा रहा था फैसला : बबला
कांग्रेस पार्षद दल के नेता देवेंद्र सिंह बबला का कहना है कि लोगों को सिर्फ इस बात से मतलब है कि उन्हें साफ सुथरे पब्लिक टायलेट्स मिलें। लेकिन लंबे समय से इस पर भाजपा पार्षदों की आपसी गुटबाजी के कारण राजनीति हो रही है। इस कारण पब्लिक टायलेट्स के संचालन और रखरखाव पर देने का फैसला नहीं हो पा रहा था।
प्रशासक का समर्थन : कैंथ
भाजपा पार्षद सतीश कैंथ का कहना है कि पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप पर ही टायलेट्स का रखरखाव और संचालन हो सकता है। जो पहले इसके लिए रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल निकाला गया था वह उसके खिलाफ नहीं थे, बल्कि इस प्रपोजल में कई खामियां थीं। वे उसके लिए सदन में आवाज उठाते थे। प्रशासक ने जो सलाह दी है वे उसका समर्थन करते हैं।