चंडीगढ़ में अधिकारियों की चुस्ती से इस साल प्रशासन में लोगों का विश्वास जगा। हर किसी की पहुंच उच्चाधिकारियों तक रही। ग्राउंड लेवल पर अफसरों के दौरे जारी रहे। सालों से अटके मास्टर प्लान की नोटिफिकेशन हुई। उसके बाद स्मार्ट सिटी प्रपोजल को कई महीनों के मंथन केबाद सबमिट करवाया गया।
साल के अंत में कुछ डिपार्टमेंट्स ने शर्मिंदा करवाया। जिनकी बैड परफॉर्मेंस का खामियाजा 225 करोड़ केबजट की कटौती केरूप में भुगतना पड़ रहा है। बजट कटते ही सभी प्रोजेक्ट्स की चाल बिगड़ गई।
प्रधानमंत्री दौरा बना गले की फांस
10 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दौरा सबसे अधिक चर्चित रहा। यह दौरा विवादों केकारण प्रशासन के गले की फांस बन गया। स्कूल बंद करने के फैसले पर खुद मोदी को खेद जताना पड़ा और कार्रवाई के आदेश भी दिए। प्रशासन स्कूल बंद करने को अपना कलेक्टिव डिसीजन बताकर जान पीछा छुड़ाया।
एस्टेट ऑफिस की वर्किंग सुधरी
एडवाइजर ने एस्टेट ऑफिस का डिजिटाइजेशन शुरू कराया। पब्लिक कैंप शुरू हुए जिनमें सैकड़ों केस निपटे। लेकिन एस्टेट ऑफिस की एक लापरवाही ने पूरे प्रशासन को शर्मिंदा भी किया। पहली बार फाइनेंस सेक्रेटरी की गाड़ी को अटैच केबाद उठा लिया गया।
कैपिटल कांप्लेक्स हुआ ओपन
कैपिटल कांप्लेक्स को पब्लिक केलिए ओपन किया गया। हेरिटेज का दर्जा दिलाने केलिए आईकोमेज की टीम ने विजिट भी किया। ओपन हैंड मॉन्यूमेंट केनीचे स्विस डांस से कल्चरल प्रोग्राम की शुरुआत हुई।
पहली बार यूटी को मिले इतने आईएएस
इस साल यूटी को खूब आईएएस मिले। पहली बार आईएएस की संख्या बढ़कर 18 हो गई है। यूटी कैडर के अधिकारी बढ़कर 11 हो गए हैं। जो चंडीगढ़ केइतिहास में सबसे अधिक है। इससे पहले सालों से जमे या एक्सटेंशन पर चल रहे अधिकारियों को रिपैट्रिएट कर दिया गया।
यह प्रोजेक्ट बने पहेली
मेट्रो प्रोजेक्ट
मेट्रो प्रोजेक्ट पर कई सालों की माथा पच्ची केबाद 2012 में डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार हुई थी। लेकिन अभी तक डीपीआर केंद्रीय परिवहन मंत्रालय से पास नहीं हो सकी है। फिल्हाल रिवाइज्ड डीपीआर पर पंजाब और हरियाणा का कंसेट लेने में मामला अटका है। देरी केकारण इसका बजट तीन साल में 10,900 से बढ़कर 13,909 करोड़ रुपये पहुंच गया है। दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने जो डीपीआर तैयार की है उसमें यह बजट एस्टीमेट दिया गया है। डीपीआर अनुसार 2016 में इस पर काम शुरू होना है और 2021 तक खत्म करना है।
सेक्रेट्रिएट की ग्रीन बिल्डिंग
सीएचबी और चंडीगढ़ पुलिस हेडक्वार्टर के बीच में सेक्रेट्रिएट की ग्रीन बिल्डिंग केलिए जगह ईयरमार्क की गई। 2007 में इसका शिलान्यास भी हो गया। लेकिन 8 साल बीत जाने केबाद भी बात शिलान्यास से आगे नहीं बढ़ी। प्रशासन आज तक इस बिल्डिंग के लिए फंड मंजूर नहीं करवा पाया।
क्लोवरलीफ फ्लाइओवर
लगातार बढ़ते ट्रैफिक को देखते हुए प्रशासन ने ट्रिब्यून चौक पर क्लोवरलीफ फ्लाइओवर बनाने की योजना बनाई थी। 2014 में इसका ड्राफ्ट पास करने केबाद धौलाकुआं फ्लाईओवर बनाने वाले एक्सपर्ट से राय लेनी थी। उसके बाद इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट ने इस प्रोजेक्ट को डंप कर दिया।
अंडर पास हुए फेल
ट्रैफिक को निर्बाध करने केलिए शहर के सबसे व्यस्त एरिया में कई अंडर पास बनने थे। इसके लिए कई बार मीटिंग हुई। पहले मामला नगर निगम और प्रशासन की आपसी खींचतान में फंसा रहा। बाद में इसे बनाने की बात आगे नहीं बढ़ी।
सेक्टर-43 मल्टी लेवल पार्किंग
सेक्टर-43 स्थित ज्यूडिशियल एकेडमी के साथ मल्टी लेवल पार्किंग केलिए जगह चिन्हित कर रखी है। इसका ड्राफ्ट प्रपोजल तक तैयार हो चुका है। पूर्व चीफ आर्किटेक्ट सुमित कौर केटाइम में ही पार्किंग बनने का रास्ता साफ हो गया था। लेकिन साल बीत जाने केबाद भी निर्माण शुरू नहीं हो सका।