नाम सरवती देवी, जन्म 1988, प्रशासन में काम के लिए नियुक्ति 1984! पढ़ने में अजीब लग रहा होगा, लेकिन प्रशासन ने कुछ ऐसा ही कारनामा किया है। दो माह पहले नगर निगम के कर्मचारियों को प्रशासन ने स्थायी कर दिया। नोटिफिकेशन की कॉपी में कर्मचारी को जन्म से चार साल पहले ही नियुक्ति दे दी। अब महिला कर्मचारी निगम से प्रशासन और प्रशासन से डॉक्टरों के पास मेडिकल सर्टिफिकेट बनवाने के लिए चक्कर लगा रही है, लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
यह सिर्फ एक कर्मचारी नहीं, बल्कि कई कर्मचारियों के दस्तावेजों में गलतियां मिली हैं, जो लगातार परेशान हो रहे हैं। साल 1984 में कुछ कर्मचारी प्रशासन में नौकरी पर लगे थे। साल 1996 में नगर निगम बना तो कर्मचारियों को प्रशासन ने नगर निगम में ट्रांसफर कर दिया। ऐसे ही 56 कर्मचारियों को दो माह पहले प्रशासन ने नोटिफिकेशन जारी कर स्थायी कर दिया। नोटिफिकेशन की कॉपी में काफी खामियां की हैं, जिसका भुगतान कर्मचारियों को करना पड़ रहा है। उन्ही में से एक महिला कर्मचारी सरवती भी है, जो दो माह से सिर्फ स्थायी होने के लिए चक्कर लगा रही है।
निगम में स्थायी भर्ती केलिए मेडिकल सर्टिफिकेट चाहिए। जन्म से पहले नौकरी करना संभव नहीं है, लेकिन दस्तावेजों में यही दर्शाया गया है, इसलिए सरवती देवी निगम, प्रशासन के अधिकारियों से लेकर डॉक्टरों के पास चक्कर लगा रही है।
असल में जन्मतिथि 1968, प्रशासन के कार्ड पर भी उल्लेख
असल में दस्तावेजों में सरवती की जन्मतिथि 1968 है। 1984 में भर्ती के दौरान प्रशासन की ओर से बनाए गए कार्ड में भी यह जन्मतिथि अंकित की गई है। उसके बाद रिलीविंग लेटर में भी यही जन्मतिथि है, लेकिन प्रशासन के कर्मचारियों की लापरवाही से नोटिफिकेशन की कॉपी में गलती कर दी गई।
इस उम्र में हड्डी व दांत से नहीं पता कर सकते उम्र
जीएमएचएच 16 के प्रिंसिपल मेडिकल ऑफिसर की रिपोर्ट में लिखा गया है कि मनुष्य की हड्डी और दांतों से उसकी उम्र का पता लगाया जा सकता है, लेकिन इस उम्र में इन दोनों ही विधियों से महिला की उम्र का पता लगाना मुश्किल है। नियमानुसार बिना मेडिकल सर्टिफिकेट के महिला को स्थायी नहीं किया जा सकता।
दलवीर हो गए बलबीर, जन्मतिथि भी बदली
ऐसा ही एक और केस निगम के बेलदार दलवीर के साथ हुआ है। नोटिफिकेशन की कॉपी में दलवीर का नाम बलवीर कर दिया गया है। वहीं, उसकेपिता का नाम और जन्मतिथि भी बदल दी है। दलवीर का कहना है कि जन्मतिथि तो छोड़िए कम से कम मेरे पिता का नाम और मेरा नाम तो ठीक कर दिया जाए। इससे कई बार बच्चों के सर्टिफिकेट में भी समस्या आती है। नाम बदलने से कई बार बच्चों के फॉर्म रिजेक्ट हो चुके हैं।
प्रशासन की रिव्यू कमेटी ही करेगी समाधान
ऐसे ही कई कर्मचारी हैं, जिनके नाम, जन्मतिथि, पिता का नाम अथवा अन्य दस्तावेजों में खामियां हैं। कर्मचारी या तो अनपढ़ हैं या इस उम्र में हैं कि बार-बार प्रशासन से निगम तक चक्कर नहीं लगा सकते हैं। सामान्य तरीके से इसमें खामियां दूर करना संभव भी नहीं है। अधिकारियों का मानना है कि इस संबंध में प्रशासन को एक रिव्यू कमेटी बनानी होगी, जो नोटिफिकेशन में कमियां होने पर उसका रिव्यू करे और सुधार कराए ताकि उम्र के इस पड़ाव में कर्मचारियों को भटकना न पड़े।
मैंने चेक कराया है। कर्मचारियों के दस्तावेजों और नोटिफिकेशन की कॉपी को मिलान करेंगे। यदि जरूरत होगी तो प्रशासन से बात करके इसका समाधान निकालेंगे।
- संजय कुमार झा, स्पेशल कमिश्नर, नगर निगम