शहर में खेती को लेकर यूटी प्रशासन कितना गंभीर है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि प्रशासन के खेती विभाग में सिर्फ सात कर्मचारियों की तैनाती है। इनमें से पांच बेलदार (माली), एक सुपरवाइजर और एक क्लर्क है। विभाग के कर्मचारी सेवानिवृत्त होते गए लेकिन भर्तियां नहीं हुईं।
कम कर्मचारियों की वजह से केंद्र सरकार की योजनाएं किसानों तक नहीं पहुंच पाती हैं। न ही विभाग की तरफ से किसानों के लिए कोई कार्यक्रम चलाए जाते हैं। इसकी वजह से खेती कमजोर होती जा रही है। किसानों की आय भी कम हो गई है। आय बढ़ाने के लिए किसान दूसरे व्यवसाय की तरफ रुख कर रहे हैं इसलिए ही वह अपनी कृषि भूमि पर इस्तेमाल मकान बनाने में कर रहे हैं, ताकि उन्हें किराये पर देकर कमाई की जा सके। ऐसा लगभग हर गांव में हो रहा है।
किसानों की आय हुई कम
पेरीफेरी में अवैध निर्माण के पीछे कई कारण हैं। कृषि भूमि कम होने से किसानों की आय काफी कम हो गई है इसलिए वह दूसरे व्यवसाय की तरफ जा रहे हैं। यह चिंता की बात है। जब किसान दूसरे व्यवसाय की तरफ जाएंगे तो खेती की जमीन का इस्तेमाल अन्य कामों में होगा। प्रशासन शहर के किसानों के लिए कुछ नहीं कर रहा है। प्रशासन के पास यह जानकारी भी नहीं है कि कितनी कृषि भूमि का इस्तेमाल अन्य कामों में किया जा रहा है। - राहुल महाजन, सामाजिक कार्यकर्ता
अवैध निर्माण से पर्यावरण पर पड़ रहा है असर
पेरीफेरी में तेजी से अवैध निर्माण हो रहे हैं लेकिन चंडीगढ़ प्रशासन आंखें मूंदकर बैठा है। शहर के बीच के सेक्टरों में अगर किसी तरह का अवैध निर्माण होता तो प्रशासन उसे तोड़ने में बड़ी तत्परता दिखाता है। यही तत्परता इन पेरीफेरी और गांव में होने वाले अवैध निर्माण पर भी दिखानी चाहिए, क्योंकि इससे शहर की सूरत बिगड़ रही है और इसका सबसे बड़ा नुकसान चंडीगढ़ के पर्यावरण पर पड़ रहा है। - हितेश पुरी, चेयरमैन, क्राफ्ड।
पहले सख्ती बरतते तो अब नहीं होती समस्या
पेरीफेरी में जो अवैध निर्माण हो रहा है, उसका असर भले ही आज न दिखाई दे लेकिन इसका असर कुछ वर्षों बाद शहर के वातावरण पर जरूर दिखाई देगा। लाल डोरे के बाहर आज बहुत ज्यादा निर्माण हो गए हैं, चंडीगढ़ प्रशासन के अधिकारी अगर पहले ही सख्ती बरतते तो शहर में लाल डोरे की समस्या ही न होती। खेती की जमीन पर हो रहा अवैध निर्माण पर्यावरण के लिए चिंताजनक है। ऐसे में प्रशासन को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। - एनके झींगन, सचिव, एनवायरनमेंट सोसाइटी ऑफ इंडिया।