वीआईपी ड्यूटी बढ़ी, गाड़ियां नहीं
शहर में लगातार वीआईपी ड्यूटी बढ़ रही हैं। शहर में आयोजन भी काफी संख्या में होते हैं। वहीं, मार्केटों में भी लगातार मॉकड्रिल होती रहती है। इन पुरानी गाड़ियों के साथ सुरक्षा की कमान संभालना कर्मचारियों के लिए भी चुनौती है। कर्मचारियों का कहना है इस समय टेक्नोलॉजी इतनी आगे पहुंच गई है, लेकिन इसका शहर को कोई फायदा नहीं मिल रहा है।
लोगों पर बीएस-6 खरीदने का दबाव, इनका मॉडल पुराना
देश भर में सरकार लोगों से बीएस-6 मॉडल की गाड़ियां खरीदने के लिए दबाव बना रही है, जबकि चंडीगढ़ देश की प्रमुख 98 स्मार्ट सिटी में शामिल है। जब स्मार्ट सिटी के वाहन पुराने ढर्रे पर चलेंगे तो लोगों से नए मॉडल के वाहन लेने के लिए कहना कहां तक सही होगा।
डंपिग ग्राउंड की आग बुझाने में लग जाते हैं कई दिन
डंपिग ग्राउंड पर हर साल गर्मियों में आग लगने की घटनाएं सामने आती रही हैं। हाल में लगी आग को बुझाने में फायर ब्रिगेड विभाग को पांच दिन लग गए थे। कर्मचारियों का कहना है कि जितनी तेज धार से पानी जाना चाहिए, मशीनों से अब नहीं जाता है। इस कारण पानी भी खर्च हो जाता है और गाड़ियों के चक्कर भी ज्यादा लगते हैं। इससे डीजल की बर्बादी होती है। नई टेक्नोलॉजी की मशीन होती तो आग पर जल्दी काबू पाया जा सकता है।
यह गाड़ियां हैं फिलहाल निगम के पास
शहर में अग्निशमन के 7 कार्यालयों में 49 गाड़ियां हैं। इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 में 6, फेज-2 में 6, सेक्टर-32 में 6, सेक्टर-17 में 9, मनीमाजरा में 7, सेक्टर-11 में 6 और सेक्टर-38 में 9 गाड़ियां हैं। इनमें फायर टेंडर से लेकर मोटरसाइकिल तक शामिल हैं।
गाड़ियों की उम्र 15 साल होती है, लेकिन हर साल गाड़ियों का फिटनेस टेस्ट करवाया जाता है। इसमें सारी गाड़ियां फिट हैं, इसलिए नई गाड़ियां नहीं खरीदी गई हैं। जरूरत के अनुसार आगे तय करेंगे। -केके यादव, निगम आयुक्त