चंडीगढ़ में वरिष्ठ नागरिकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए यूटी प्रशासन ने 22 साल बाद नया सरकारी वरिष्ठ नागरिक गृह बनाने का फैसला लिया है। ये गृह सेक्टर-34 में बनेगा और इसके लिए 1.26 एकड़ की भूमि चयनित की गई है। होम में 100 लोगों के रहने की व्यवस्था होगी। आर्किटेक्ट विभाग इस गृह के लिए ड्राइंग बनाने में लग गया है।
वर्तमान में शहर में दो सरकारी वरिष्ठ नागरिक गृह हैं। एक सेक्टर-15 में और दूसरा सेक्टर-43 में। सेक्टर-15 के वरिष्ठ नागरिक गृह में सिर्फ निराश्रित बुजुर्गों को रखा जाता है। यहां 18 कमरे हैं जबकि सेक्टर-43 के वरिष्ठ नागरिक गृह में 24 कमरे हैं। हालांकि यहां रहने वाले वरिष्ठ नागरिकों को 15 हजार से 16 हजार रुपये खर्च करने पड़ते हैं। इस गृह में अधिकतर सेवानिवृत बुजुर्ग पुरुष और महिलाएं रह रही हैं, जिन्हें पेंशन मिलती है।
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कई साल से हो रही थी मांग
दो वरिष्ठ नागरिक गृह होने के बावजूद पिछले कई वर्षों से नया वरिष्ठ नागरिक गृह बनाने की मांग हो रही थी। यूटी प्रशासक के सलाहकार परिषद की समाज कल्याण पर स्थाई समिति ने भी नया वरिष्ठ नागरिक गृह बनाने का परिषद को सुझाव दिया था। इस पर अब यह तय हुआ है कि तीसरा सरकारी गृह 100 लोगों के लिए सेक्टर-34 में बनेगा। इसके लिए 1.26 एकड़ भूमि चयनित की गई है। बता दें कि सरकारी वरिष्ठ नागरिक गृह के लिए काफी लोग आवेदन करते हैं लेकिन जगह नहीं होने की वजह से उन्हें निराश होना पड़ता है। इस वजह से ही नया गृह बनाया जा रहा है।
समाज कल्याण विभाग ने जरूरतें बताईं
बीते दिनों हुई सलाहकार परिषद की बैठक में समाज कल्याण पर स्थाई समिति की एक्शन टेकन रिपोर्ट में वरिष्ठ नागरिक गृह पर तेजी से काम करने का जिक्र था। पूर्व सांसद सत्यपाल जैन की अध्यक्षता वाली स्थाई समिति ने समाज कल्याण विभाग और यूटी प्रशासन के आर्किटेक्ट विभाग को इस गृह के निर्माण को जल्द शुरू करने के आदेश दिए गए हैं। एक्शन टेकन रिपोर्ट में बताया गया है कि आर्किटेक्ट विभाग ने समाज कल्याण विभाग से गृह को लेकर जरूरतें मांगी थी, जिसे भेज दिया गया है। अब आर्किटेक्ट विभाग गृह को बनाने के लिए ड्राइंग तैयार कर रहा है। इस काम के पूरा होने के बाद इंजीनियरिंग विभाग की तरफ से टेंडर जारी किया जाएगा।
छह साल में मजदूर भवन के लिए जगह चिन्हित नहीं कर पाया प्रशासन
शहर में रोजाना हजारों मजदूर विभिन्न चौक पर काम के लिए बैठते हैं। वर्ष 2017 में मजदूर भवन के लिए मांग उठी थी, जिसे पूर्व सांसद सत्यपाल जैन ने 2021 में दोहराया लेकिन छह साल बाद भी अब तक न जगह तय हुई है और न ही कोई ठोस काम हुआ है। सिर्फ चर्चाएं ही चल रही हैं। वर्ष 2022 में फैसला हुआ था कि मजदूर भवन उस जगह पर बनना चाहिए जहां सबसे ज्यादा मजदूर होते हैं। इसके लिए सेक्टर-44 का चुनाव हुआ था लेकिन आज तक प्रशासन जगह चिन्हित नहीं कर पाया है। आठ अक्टूबर 2021 को प्रशासक ने समाज कल्याण समिति के अध्यक्ष के साथ इस मामले पर चर्चा की और प्रस्ताव की सराहना की लेकिन आज तक नतीजा शून्य है।
सभी की सहमति, लेकिन कोई गंभीर नहीं
शहर में एक लाख से ज्यादा मजदूर हैं जो शहर के विकास में अहम भूमिका रखते हैं। सांसद से लेकर पूर्व सांसद और प्रशासक भी मजदूर भवन बनाने पर सहमति जता चुके हैं लेकिन प्रशासन के अधिकारी अब तक एक योजना तक नहीं बना पाए हैं। ऐसा लग रहा है कि मजदूरों का मामला होने की वजह से कोई गंभीर नहीं है। एक ऐसा भवन बनाने की बात हुई थी जहां मजदूर अपने समारोह और विवाह आदि के कार्यक्रमों का आयोजन कर सकें। भवन में कुछ कमरे, बड़ा हॉल, कैंटीन आदि की सुविधा देने की बात की गई थी।